भोपाल, माधव एक्सप्रेस।
मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस को ताज तो राजस्थान में काटें की टक्कर बताई जा रही है। बहीं मध्यप्रदेश में असमंजस की स्थिति बरकरार है कुछ सर्वे में कांग्रेस की जीत तो कुछ ने भाजपा को सत्ता में वापसी का अनुमान लगाया है। मिजोरम में एमएनएफ को ताज मिल सकता है। ऐसे तो एग्जिट पोल पूवार्नुमान होते है। सही फैसला तो 3 दिसंबर को होगा। कई बार एग्जिट पोल गलत भी साबित हुए हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में महंगाई और जीएसटी को लैकर गुस्सा था तो दूसरी ओर लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं के मन में सरकार के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर पैदा किया।
नोट बंदी एवं जीएसटी का प्रभाव अब: केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी और जीएसटी लागू किए जाने के बाद से आर्थिक कठिनाइयों का नया दौर शुरू हुआ है। नोटबंदी के कारण कई महीने तक व्यापार और औद्योगिक गतिविधियां ठप्प हो गई थी। जीएसटी के कारण भी उद्योग और व्यापार में इसका विपरीत असर पड़ा। भारतीय नागरिकों के ऊपर जीएसटी के माध्यम से भारी टैक्स वसूली का असर मंहगाई के रुप में पड़ने लगा। 2019 के बाद से बेतहासा मंहगाई बढ़ रही है। 2018 के बाद से ही राज्य सरकारों की आर्थिक कठिनाइयां बढ़ने लगी। राज्यों के चुनाव में इसका असर दिखने लगा। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनी। अन्य राज्यों में भी इसी तरीके का परिवर्तन देखने को मिला। जीएसटी के दायरे में धीरे-धीरे सभी सेवाओं को भी शामिल कर लिया गया। अब कोई भी सेवा या कोई भी कारोबार बाकी नहीं है। जिसमें जीएसटी नहीं लगता हो। इसी बीच कोरोना महामारी आई। कोरोना महामारी के बाद कारोबार पर इसका बड़ा असर पड़ा। बेरोजगारी बढ़ी, लोगों की आय कम हुई, खर्च बढ़ गए। महंगाई लगातार बढ़ती चली गई, आम लोगों के ऊपर कर्ज भी बढ़ता चला गया। 2022 के बाद से यह नाराजगी अब स्पष्ट रूप से जनता के बीच में देखने को मिलने लगी। 2023 में जो भी विधानसभा चुनाव हुए हैं वह सब मतदाताओं की नाराजगी के चलते परिवर्तन के लिए हुए हैं। हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। वहां पर भी मतदाताओं की नाराजगी भाजपा को पराजय के रुप में झेलनी पड़ी। कर्नाटक में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, वहां पर भी भाजपा की पराजय हुई। दिल्ली नगर निगम के चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी को पराजित होना पड़ा। यह मतदाताओं की नाराजगी और सत्ता परिवर्तन का संकेत है।

2003 जैसे हालात: 2003 में कुछ इसी तरीके के हालात थे। जो वर्तमान में देखे जा रहे हैं। उस समय दिग्विजय सिंह भी कहते थे कि प्रबंधन के जरिए चुनाव जीते जाते हैं। 2003 में सड़क, पानी, बिजली की स्थिति बहुत खराब थी। भारतीय जनता पार्टी की ओर से उमा भारती ने बड़ी आक्रामक शैली से चुनाव लड़ा और आशा के विपरीत दो तिहाई बहुमत से भारतीय जनता पार्टी यह चुनाव जीती थी। उस समय कांग्रेस और भाजपा दोनों ही चुनाव परिणाम को लेकर आश्चर्यचकित थे, कि ऐसा कैसे हो गया। 2023 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के सभी अंचलों के मतदान के पूर्व और मतदान के बाद सर्वे में एक बात समान रूप से पाई गई है, कि इस बार मतदाता परिवर्तन करना चाहता है। मतदान के दौरान भी अधिकांश मतदाता पोलिंग बूथ पर इसी तरह की बात खुलकर कह रहा था।
लाडली बहना योजना: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ी कुशलता के साथ लाडली लक्ष्मी बहना योजना और रसोई गैस में सब्सिडी देकर महिलाओं तक अपनी पहुंच बनाने का काम किया। भारतीय जनता पार्टी भी इस बात को समझ रही है कि यदि महिलाओं का समर्थन उसके पक्ष में आ गया, तो चुनाव उसके पक्ष में आना तय है। लेकिन महिलाएं भी लाड़ली बहना योजना को लेकर कई भागों में बटी हुई हैं। योजना में सभी महिलाओं को शामिल नहीं किया गया। दूसरा चुनाव के दो माह पहले शुरू की गई इस योजना का लाभ कांग्रेस ने 1500 प्रतिमाह देने को वचन पत्र में शामिल किया है। जिसके कारण महिलाओं के बीच इसकी समान प्रतिक्रिया रही है।
चमत्कारिक होंगे चुनाव परिणाम: 2023 का मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव अपने आप में अनूठा है। इसको समझने के लिए हमें 1990 से लेकर 2023 तक के परिणाम का विश्लेषण करके सर्वे के इस निष्कर्ष पर पहुंच पाए हैं। कांग्रेस को इस चुनाव में 42.90 फीसदी मत प्राप्त हो रहे हैं। कांग्रेस को 151 सीट मिल सकती हैं। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी का वोट बैंक 2.7 फीसदी घटकर 38.3 फीसदी रहने का अनुमान है। जिसके कारण भारतीय जनता पार्टी को इस चुनाव में अधिकतम 69 सीट मिलने के आसार बन रहे हैं। इस चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सीधा मुकाबला था। जहां पर सपा, बसपा, गोंडवाना, एवं अन्य कोई उम्मीदवार जीतने की स्थिति में था। वहीं पर त्रिकोणीय स्थिति बनी हैं। बाकी विधान सभा क्षेत्रों में वोटो का बटवारा बहुत कम हुआ है। इसका लाभ भी कांग्रेस के पक्ष में होता हुआ दिख रहा है।
1990 से 2023 के विधानसभा चुनाव का विश्लेषण: 1990 का विधानसभा चुनाव राम मंदिर और राम रथ यात्रा के बीच में हुआ था। इस चुनाव में 54.19 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया था। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 220 सीट मिली थी। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 39.14 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे। कांग्रेस को 56 सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। कांग्रेस का वोट प्रतिशत 33.38 फीसदी रह गया था। 44 सीट अन्य दलों को प्राप्त हुई थी। 2000 तक मध्य प्रदेश की विधानसभा में 320 सीटों पर चुनाव होते थे।
1993 का विधानसभा चुनाव: उत्तर प्रदेश में कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद को 6 दिसम्बर 1992 को ढहा दिया था। उसके बाद मध्य प्रदेश की तत्कालीन सुंदरलाल पटवा की सरकार को केन्द्र सरकार ने बर्खास्त कर दिया गया था। म.प्र. राष्ट्रपति का शासन लागू हो गया था। 1993 में विधानसभा चुनाव हुए। 1993 में 60.52फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया था। इसमें कांग्रेस का वोट बैंक लगभग 7 फीसदी बढा। कांग्रेस को 40.67 फीसदी वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस को 174 सीटों पर विजय प्राप्त हुई भारतीय जनता पार्टी का वोट बैंक मात्र 0.22 घटा और भारतीय जनता पार्टी को 101 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। हार जीत का अंतर बहुत कम रहा। 1993 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 38.92 फीसदी वोट मिले थे। अन्य को 27 सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। 1998 में दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब हो चली थी। बिजली और सड़कों की समस्या खराब होती जा रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कांग्रेस ने पूरी सजगता के साथ चुनाव लड़ा।
