इंदौरl इंदौर को ट्रैफिक के मामले में नंबर वन बनाने की बातें तो पिछले पांच छह वर्षों से की जा रही है, लेकिन बनाने की दिशा में कोई रुचि नहीं ले रहा है। हालत इतनी खराब है कि सुबह से शाम ज्यादातर सड़कों पर चक्का जाम नजर आता है। सबसे पहले बात करें गाड़ियों की नंबर प्लेट की तो डिजाइनर नंबर प्लेट वाले 80-100 की रफ्तार से गाड़ियां भगाते हैं लोगों की जान ले लेते हैं पकड़ में भी नहीं आते। दुपहिया हो या चार पहिया नंबर 4141 हो तो उसे पापा की शक्ल में लिखा जाता है ऐसे नंबर एक नहीं अनेक मिल जाएंगे। नंबर 1786 है तो एक को छोटे-छोटे अक्षरों में लिखा जाता है। ताकि किसी को टक्कर मारकर भागने पर पकड़े नहीं जा सके। कई लोग नंबर प्लेट पर राजपूती मूंछ बना कर सिंबल लगाते हैं और नंबर गायब कर देते हैं। कोई नंबर प्लेट पर ब्राह्मण लिखता है तो कोई मौर्य, गुर्जर अब तो भील और आदिवासी भी लिखा जाने लगा है। क्या आरटीओ गुर्जर ब्राह्मण नंबर देने लगा हैं। अगर नहीं तो कार्रवाई क्यों नहीं होती है। इंदौर में नई सड़कों का जाल बिछा कर ट्रैफिक सुधारने पर किसी का ध्यान नहीं है। सुभाष मार्ग को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में लेकर 100 फुट चौड़ा बनना था लेकिन उसे स्मार्ट सिटी योजना से ही बाहर कर दिया गया। झांसी की रानी प्रतिमा से सुभाष मार्ग चौराहा होकर मल्हारगंज चौराहे तक की सड़क बनाने के लिए ठेकेदार नहीं मिलने की बात कही जा रही है। एमआर – 4 एमआर – 5 का काम धीमी गति से हो रहा है। काम कब पूरा होगा कहा नहीं जा सकता। सदर बाजार से झांसी की रानी प्रतिमा चौराहे तक की सड़क के लिए भी ठेकेदार नहीं मिल रहा है। आखिर ठेकेदार मिलेगा कि नहीं कोई जवाब देने को तैयार नहीं है। मल्हारगंज चौराहे से झांसी की रानी प्रतिमा तक हर दिन हजारों गाड़ियां जाम में फंसी रहती है। बड़ा गणपति चौराहे से लेकर गोमटगिरि तक हर चौराहे पर चक्का जाम नजर आता है। सपना संगीता रोड कब्जे वालों की वजह से जाम रहता है। छावनी चौराहे से लेकर जीपीओ तक हर जगह जाम नजर आता है। कमोबेश सारे शहर की यही हालत है। आखिर हमारा महानगर इंदौर ट्रैफिक में नंबर वन कब बनेगा या बातों ही बातों में काम चलता रहेगा।
