सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष को राहत देते हुए शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी। सर्वेक्षण यह तय करने के लिए किया जा रहा है कि क्या 17वीं शताब्दी की मस्जिद का निर्माण एक हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया है।
सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने एएसआई को सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की तोडफ़ोड की कार्रवाई से मना कर दिया। पीठ ने एएसआई और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों का संज्ञान लिया कि सर्वेक्षण के दौरान कोई खुदाई नहीं की जाएगी और न ही संरचना को कोई नुकसान पहुंचाया जाएगा।
एक जिला अदालत ने एएसआई को यह निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण का निर्देश दिया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई थी। इस फैसले को अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन इसने बृहस्पतिवार को याचिका खारिज कर दी थी। उसके बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा था।
मुस्लिम निकाय अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई के सर्वेक्षण का इरादा इतिहास खंगालना है और यह अतीत के घावों को फिर से हरा कर देगा। मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दलील दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की यह कवायद इतिहास को कुरेदने, पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन करने और भाईचारे और धर्मनिरपेक्षता को प्रभावित करने के लिए की जा रही है।
पीठ ने कहा, आप एक ही आधार पर हर अंतरिम आदेश का विरोध नहीं कर सकते और आपकी आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान फैसला किया जाएगा। अहमदी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सर्वेक्षण आदेश पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, एएसआई सर्वेक्षण का इरादा इतिहास खंगालकर यह जानने का है कि 500 साल पहले क्या हुआ था। यह अतीत के घावों को फिर से हरा कर देगा।
