पवान ने कहा, देश की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए संसद का पुराना भवन बनाया गया था
पुणे । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अजित पवार ने नए संसद भवन के उदघाटन की प्रशंसा की। उन्होंने सभी सांसदों को एक साथ आकर देश के आम लोगों के लिए काम करने और उनके मुद्दों को हल करने का सुझाव दिया। इससे पहले एनसीपी ने उदघाअन कार्यक्रम में जाने से इनकार कर दिया था। पार्टी प्रमुख और अजित के चाचा शरद पवार ने भी उदघाअन कार्यक्रम में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को न बुलाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि मैंने नए संसद भवन के उदघाटन कार्यक्रम को देखा। मुझे खुशी है कि मैं वहां नहीं गया है। वहां जो कुछ भी हुआ, उसे देखकर मैं चिंतित हूं। क्या हम देश को पीछे की ओर ले जा रहे हैं। मैं जिस सदन का सदस्य हूं, उसके सभापति को ही नहीं बुलाया गया। जिनके संबोधन से संसद सत्र की शुरुआत होती है, उन्हें ही निमंत्रण नहीं दिया गया। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आधुनिक भारत की अवधारणा की बात करने और नई दिल्ली में नए संसद भवन में किए गए अनुष्ठानों की श्रृंखला में बहुत बड़ा अंतर है। अजित पवार ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि अंग्रेजों ने अपनी संसद (पुरानी इमारत) बनाई थी। अब जिस नए संसद भवन का उदघाटन हो रहा है, उसे हमने खुद बनाया है।
महाराष्ट्र के पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए पवार ने कहा कि आजादी के बाद कई राज्यों ने अपने विधानसभा भवन बनाए हैं। महाराष्ट्र ने भी 1980 के बाद एक नया विधानसभा भवन बनाया है, लेकिन वर्तमान में हमारे बीच चर्चा है कि महाराष्ट्र में एक नया विधानसभा भवन होना चाहिए। पुराने संसद भवन के निर्माण के समय देश की जनसंख्या की तुलना वर्तमान जनसंख्या से करते हुए अजित ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के साथ लोगों का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा और मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि इस नए भवन की आवश्यकता थी।
देश की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए जब संसद का पुराना भवन बनाया गया था, हम भारत में 35 करोड़ लोग थे और अब हम 135 करोड़ हैं। इसको देखते हुए अब लोगों का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा। इसलिए पुरानी इमारत से संबंध होने के बावजूद मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि इस नए भवन की आवश्यकता थी। अजित पवार ने कम समय में संसद के नए भवन के बनने की प्रशंसा की और कहा कि इमारत रिकॉर्ड समय में बनाई गई है। कोविड के समय में भी निर्माण कार्य चल रहा था और आखिरकार हमें एक अच्छा संसद भवन मिल गया है। अब इस नए भवन में सभी लोग संविधान के अनुसार काम करेंगे और आम लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे। इसमें सभी की भागीदारी होगी।
