1.
शिव पार्वती विवाह का , उत्सव है गणगौर ।
गीत झलरिया पर्व में ,गाते हैं सब ठौर ।।
2.
हमको मिले सुयोग वर , करें युवतियाँ आस ।
ये पूजन गणगौर का , है निमाड़ में खास ।।
3.
अधिक समय तक माँ चले , सबका सौख्य सुहाग ।
खुशहाली की कामना , करतीं महिला जाग ।।
4.
चैत्र कृष्ण एकादशी , बैठे माता मूठ ।
शुक्ल तृतीया चैत्र को , खोलें बाड़ी खूँठ ।।
5.
रखकर माता मूठ को , होय पर्व शुरुआत ।
गण गौरी के रूप में , शिव पार्वती सुहात ।।
6.
राजा धनियर बाइरणु , शिव गौरा अवतार ।
ज्वारे बाँसे टोकरी , में बोती हैं नार ।।
7.
सामूहिक पूजन करें , माँ को घर ले जायँ ।
कहते इसे निमाड़ में , माता पाट बिठायँ ।।
8.
सुख समृद्धि अरु देश की, खुशहाली की आन ।
ज्वारे गले लगायँ सब , करें विसर्जन गान ।।
9.
काली मिट्टी गेहुँ का , केशर कस्तुरि नाम ।
हमें पता इससे चले , ज्वारा रस का दाम ।।
प्रबोध मिश्र ' हितैषी '
बड़वानी (म. प्र . ) 451 551
