लेखक- प्रदीप जैन
सियासी जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौसा से जिस तरीके से राजस्थान के सभी जिलों का जिक्र करके उनकी अपनी उपयोगिता और उनकी महत्ता का जिक्र किया, उससे उन्होंने सीधे तौर पर राजस्थान के ज्यादातर जिलों से अपना कनेक्ट कायम कर दिया।
18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था। इसी शिलान्यास के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल का आगाज करते हुए सत्ता वापसी की नींव रखी थी। रविवार को दौसा में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी राज्य राजस्थान में दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे का शुभारंभ करके चुनावी बिगुल बजा दिया। तो क्या भारतीय जनता पार्टी के लिए एक्सप्रेसवे के शिलान्यास और शुभारंभ वाला फॉर्मूला उनको सत्ता में लेकर आता है। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के सबसे लंबे और अत्याधुनिक ग्रीन एक्सप्रेस वे का शुभारंभ कर राजस्थान में चुनावी बिगुल बजा दिया है। इस दौरान मोदी ने किसानों से लेकर राज्य के व्यापारियों और हर जिले की विशेषताओं का जिक्र कर सबको साधने की सियासी कोशिश भी की।
जिस तरीके से उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर से की ठीक उसी तर्ज पर दौसा में दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे का शुभारंभ भी किया। दोनों बड़े सियासी राज्यों में एक्सप्रेस-वे के माध्यम से चुनावी बिगुल बजाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो रविवार को राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की वापसी जरूरी है की बात भी कह डाली। यह बात बिल्कुल सही है कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया और उसके बाद उत्तर प्रदेश में सत्ता की वापसी की ठीक उसी तर्ज पर राजस्थान में भी पीएम मोदी ने चुनावी बिगुल बजाया है। हालांकि, यह महज एक इत्तेफाक हो सकता है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल का आगाज एक्सप्रेसवे के माध्यम से हो रहा है। लेकिन सत्ता की वापसी चुनाव जीतना उन सबके लिए सिर्फ एक पहलू ही महत्वपूर्ण नहीं होता है। उसके लिए राज्य के विकास से लेकर वहां की योजनाओं आधारभूत संरचनाओं और विजन के साथ किए गए कार्यों पूरा रोड मैप रखने की आवश्यकता होती है।
सियासी जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौसा से जिस तरीके से राजस्थान के सभी जिलों का जिक्र करके उनकी अपनी उपयोगिता और उनकी महत्ता का जिक्र किया उससे उन्होंने सीधे तौर पर राजस्थान के ज्यादातर जिलों से अपना कनेक्ट कायम कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने हर जिले की एक विशेष उपयोगिता का अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौसा में दिए गए भाषण को अगर आप बहुत बारीकी से समझे तो उन्होंने हर समाज और तबके को बखूबी साधा है। इसमें चाहे विश्वकर्मा समाज हो या राजस्थान की चित्रकारी करने वाले जनजाति के लोग। राजस्थान की लोक कला को जीवित रखने वाले समुदाय की बात हो या विषम परिस्थितियों में अन्न उगाने वाले किसान। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इन सब का जिक्र करके सीधे तौर पर इनसे अपना कनेक्ट बनाया है।
राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली अब सियासी गतिविधियों को और आगे लेकर जाएगी। दर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सप्रेसवे के बहाने राजस्थान की उस सियासत की नब्ज को पकड़ा है जो कि चुनाव में परिणामों की दशा और दिशा तय करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सप्रेस वे के माध्यम से न सिर्फ राजस्थान के बड़े व्यापारिक समुदाय ट्रांसपोर्टरो को भी सीधे तौर पर जोड़ा बल्कि राजस्थान की उन फसलों का भी जिक्र किया जो अब श्रीअन्न के नाम से पूरे देश और दुनिया में पहचानी जा रही है। इस रैली के माध्यम से पीएम नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के किसानों को सीधे तौर पर जोड़ते हुए कहा कि उनके पैदा किए जाने वाले मोटे अनाजों को श्री अन्न के नाम से जाना जा रहा है। श्री अन्न बाजरा, श्री अन्न ज्वार और श्री अन्न कोदों का जिक्र कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बड़े तबके को सीधे तौर पर कनेक्ट किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौसा में आयोजित रैली के दौरान एक्सप्रेस वे से जुड़कर राजस्थान के विकास का पूरा डेवलपमेंट का खाका खींच दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने इमोशनल कनेक्ट बनाते हुए राजस्थान के शहीदों के नाम पर रखे गए अंडमान निकोबार द्वीप समूह के दो द्वीपों की भी चर्चा की। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में पीने के पानी की व्यवस्था का जिक्र करते हुए एक बड़ी समस्या के हल की बात की वह भी राजस्थान में बीते कई सालों से एक बड़ा मुद्दा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से रविवार को राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ी रैली कर माहौल बनाया है आगे भी जारी रहेगा।
