इन्दौर । इन्दौर के शासकीय विधि महाविद्यालय में धार्मिक कट्टरता पढ़ाए जाने का मामला तुल पकड़ने के बाद इन्दौर पुलिस ने विवादित किताब की लेखिका और प्रकाशक के साथ ही महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इनामुर्रहमान और एक प्राध्यापक के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है। इसके बाद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इनामुर्रहमान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं महाविद्यालय के कुछ प्राध्यापकों को निलंबित करने की भी जानकारी मिली है।
छात्र संगठन अ.भा. विद्यार्थी परिषद् का आरोप है कि कानून के विद्यार्थियों को पढ़ाई जा रही उस किताब में हिंदू समुदाय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं जिनसे धार्मिक कट्टरता को बल मिलता है।
भंवरकुआं थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया ने बताया कि विवादित पुस्तक का नाम सामूहिक हिंसा एवं दांडिक न्याय पद्धति है जिसकी लेखिका डॉ. फरहत खान व प्रकाशक अमर लॉ पब्लिकेशन के अलावा विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इनामुर्रहमान और प्राध्यापक मिर्जा मोजिज बेग के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। चौरसिया ने बताया कि यह एफआईआर शा. नवीन विधि महाविद्यालय के एक विद्यार्थी की शिकायत पर भारतीय दंड विधान की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर दो समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) 295-ए (किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जान-बूझकर किए गए विद्वेषपूर्ण कार्य) और अन्य संबद्ध प्रावधानों के तहत दर्ज की गई है।
:: आंदोलन से आहत हुए प्राचार्य इस्तीफा दिया ::
विवाद बढ़ने और एफआईआर दर्ज होने के बाद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इनामुर्रहमान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्राचार्य ने उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त भेजे अपने इस्तीफे में लिखा है कि वह महाविद्यालय के विद्यार्थियों और बाहर के अज्ञात लोगों के आंदोलन से आहत हैं और इस घटनाक्रम के बाद विवश होकर पद छोड़ रहे हैं।
:: महाविद्यालय परिसर में पुलिस बल तैनात था ::
जानकार सूत्रों के अनुसार राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इन्दौर के पुलिस आयुक्त को शनिवार सुबह ही निर्देश दिया था कि हिन्दी में लिखी गई विवादित किताब के मामले की जांच के बाद एफआईआर दर्ज की जाए। शनिवार को एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले अ.भा. विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं ने विधि महाविद्यालय में विवादित किताब के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। इस दौरान महाविद्यालय परिसर में पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
:: पॉंच साल से पढ़ाई जा रही थी विवादित पुस्तक ::
अ.भा. विद्यार्थी परिषद् की महाविद्यालयीन इकाई के अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि डॉ. फरहत खान की किताब ‘‘सामूहिक हिंसा एवं दांडिक न्याय पद्धति’’ में हिंदू समुदाय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल दुर्गा वाहिनी जैसे संगठनों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘‘धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाली’’ यह किताब महाविद्यालय के पुस्तकालय में पिछले पांच वर्षों से विद्यार्थियों को पढ़ाई जा रही थी और पुस्तक को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद महाविद्यालय प्रबंधन ने इसे पुस्तकालय से आनन-फानन में हटवा दिया।
:: 2021 में विवादित अंश के बारे में पता चला ::
पुस्तक पब्लिकेशन से जुड़े हितेश खेत्रपाल का कहना है कि इस पुस्तक का पहला संस्करण वर्ष 2015 में छापा गया था। 2021 में इसके विवादित अंशों के बारे में पता चलने पर हमने इसकी लेखिका डॉ. फरहत खान से चर्चा कर किताब के संबंधित पेज बदलवा दिए थे। खेत्रपाल के मुताबिक विवादित अंशों को लेकर किताब की लेखिका पहले ही माफीनामा दे चुकी हैं।
उल्लेखनीय है कि गुरूवार को इस विवाद की शुरूआत तब हुई जब महाविद्यालय में अ.भा. विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं ने संस्थान के कुछ शिक्षकों पर नये विद्यार्थियों के बीच धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उन्होने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के बीच न केवल धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं बल्कि उनके मन में देश की सरकार तथा सेना को लेकर नकारात्मक बातें भर रहे हैं। गुरूवार के हंगामे के बाद महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. इनामुर्रहमान ने कहा था कि उन्होंने छह प्राध्यापकों को शैक्षणिक कार्य से 5 दिन के लिए मुक्त कर दिया है और जिला न्यायालय के किसी अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से इन आरोपों की जांच का निर्णय लिया है।
