नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव नजदीक हैं। इसी बीच मनीष तिवारी, आनंद शर्मा, कार्ति चिदंबरम और शशि थरूर जैसे नेता चुनाव में पारदर्शिता की बात कह चुके हैं। अब पार्टी के पुरान नेताओं की इस मांग ने एक बार फिर 22 साल पहले हुए अध्यक्ष के चुनाव की याद को ताजा कर दिया है। उस दौरान कांग्रेस की मौजूदा अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी से अब अलग हो चुके जितिन प्रसाद मैदान में थे। दोनों के बीच चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के चलते बड़ा तनाव खड़ा हो गया था। 2000 में आखिरी बार कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव आयोजित किए गए थे। तब प्रसाद खेमे ने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। समूह की तरफ से प्रदेश कांग्रेस कमेटी डेलीगेट्स की सूची में हेराफेरी के भी आरोप लगाए गए थे। प्रसाद के समर्थकों ने आरोप लगाए थे कि मतदाता सूची में फर्जी नाम भी शामिल हैं। वहीं, यह भी दावा किया गया था कि उन्हें इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों के पते नहीं दिए गए थे, जिसके चलते उनके समर्थन जुटाने की कोशिशें प्रभावित हुई थी। खास बात है कि तब चुनाव में उतरने से पहले ही प्रसाद ने पार्टी की सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी को पत्र लिखा था, जिसमें कांग्रेस प्रतिनिधियों की सूची जारी नहीं करने को लेकर सवाल उठाए गए थे। कांग्रेस के ‘जी 23’ समूह में शामिल रहे तिवारी ने कहा, ‘यह 28 प्रदेश कांग्रेस कमेटी और आठ क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी का चुनाव नहीं है। कोई क्यों पीसीसी के कार्यालय जाकर पता करे कि प्रतिनिधि कौन हैं? सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि ऐसा क्लब के चुनाव में भी नहीं होता।’ उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे (मिस्त्री से) आग्रह करता हूं कि निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिये सूची प्रकाशित की जाए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी तिवारी की राय का समर्थन किया और कहा कि हर चुनाव के लिए अच्छी तरह से परिभाषित निर्वाचक मंडल होना चाहिए।उन्होंने ट्वीट किया, ”हर चुनाव में सही ढंग से परिभाषित और स्पष्ट निर्वाचक मंडल होना चाहिए। निर्वाचक मंडल तय करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट, सही ढंग से परिभाषित और पारदर्शी होनी चाहिए। अनौपचारिक निर्वाचक मंडल कोई निर्वाचक मंडल नहीं होता। चिदंबरम ने कहा, ‘हर क्षेत्र में प्राइमरी होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए परिभाषित और पारदर्शी सदस्य सूची जरूरी है। आज हम सदस्यों की संख्या का दावा करते हैं, लेकिन किसी ने इसे सत्यापित नहीं किया है
