नई दिल्ली । केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग अपने ही भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देते हैं। जिसके कारण सीबीआई की जांच के बाद भी जिन भ्रष्ट अधिकारियों पर न्यायालय में मुकदमा चलना चाहिए। वह आराम से अपने ही विभाग में काम करते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं।
सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि सीबीआई के 75 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुमति मुकदमा चलाने की नहीं मिली है। सीबीआई गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। सीबीआई के 55 मामलों में ए समूह के अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं। वहीं 20 मामले बी और सी स्तर के अधिकारियों कर्मचारियों के हैं।
संबंधित मंत्रालयों और विभागों में अभियोजन की अनुमति के लिए कई कई वर्षों से मामले लंबित है। सीबीआई के लगातार अनुरोध करने के बाद भी इन मामलों में अनुमति नहीं मिलने के कारण भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी ओर कर्मचारी अपने पदों पर बने हुए हैं। कार्यवाही ना होने के कारण लगातार भ्रष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है। केंद्रीय सतर्कता आयोग ने भी कई बार अपनी चिंता जताई है। लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें नीचे से ऊपर तक फैली हुई है। जिसके कारण भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही नहीं हो पा रही है। भ्रष्टाचार दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच एक तरह से भ्रष्टाचारियों से वसूली का एक जरिया बनकर रह गया है।
