संसाधनों की कमी अब पढ़ाई में बाधा न बने, इसी सोच के साथ शुरू हुई ‘संभव’ पहल
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‘संभव’ पहल के माध्यम से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को घर बैठे पढ़ाई और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की कोशिश*
इंदौर, 27 अक्टूबर। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से इंदौर की शिक्षा कंपनी अरिविहान ने ‘संभव’ नाम से 60 दिवसीय क्रैश कोर्स की शुरुआत की है। इस पहल का संदेश प्रदेश के 51 जिलों में एक साथ पहुँचाया गया। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों ने ‘असंभव’ शब्द में से ‘अ’ हटाकर ‘संभव’ लिखा। यह प्रतीकात्मक गतिविधि विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास जगाने और उन्हें चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।कार्यक्रम को यूट्यूब लाइव के माध्यम से विभिन्न जिलों से जोड़ा गया। अरिविहान के 51 शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से सहभागिता की और विद्यार्थियों की शिक्षा की जिम्मेदारी निभाने का संकल्प व्यक्त किया। इंदौर स्थित सभागार से कंपनी के सह-संस्थापक रितेश सिंह चंदेल ने कार्यक्रम का संचालन किया।इस पहल के दौरान सामने आई कहानियों ने शिक्षा की जमीनी चुनौतियों को भी रेखांकित किया। मंडला में एक किसान ने अपनी मेहनत से उगाया धान भेंट कर इस प्रयास के प्रति समर्थन जताया। वहीं, उज्जैन की एक अभिभावक ने बताया कि कोचिंग की दूरी के कारण उनकी बेटी को नियमित कक्षाओं में भेजना मुश्किल था। घर से पढ़ाई की सुविधा मिलने के बाद बेटी ने त्रैमासिक परीक्षा में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। रीवा के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने भी अपने क्षेत्र में रसायन विज्ञान के शिक्षक का पद लंबे समय से रिक्त होने की समस्या साझा की। उन्होंने बताया कि ऐसे में विद्यार्थी मोबाइल के माध्यम से पढ़ाई करते हैं और वे उनके सवालों को समझने में मदद करते हैं।‘संभव’ क्रैश कोर्स के अंतर्गत कक्षा 10वीं और 12वीं के हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन लाइव कक्षाओं की व्यवस्था की गई है। इसमें पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों और अध्ययन नोट्स को शामिल किया गया है। कोर्स का शुल्क 51 रुपये निर्धारित किया गया है, ताकि सीमित संसाधनों वाले परिवारों के विद्यार्थी भी बोर्ड परीक्षा की तैयारी में इस सुविधा का लाभ ले सकें।रितेश सिंह चंदेल ने कहा, “बोर्ड परीक्षाओं में अब लगभग सौ दिन शेष हैं। इस समय विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास की सबसे अधिक जरूरत है। हमारा प्रयास है कि संसाधनों की कमी किसी विद्यार्थी की पढ़ाई और उसके सपनों के बीच बाधा न बने।”अरिविहान के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से उसके विद्यार्थी प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान बनाते रहे हैं। कंपनी का कहना है कि ‘संभव’ पहल के माध्यम से अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक परीक्षा की तैयारी से जुड़ी शैक्षणिक सामग्री और मार्गदर्शन पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।‘असंभव’ से ‘संभव’ तक का यह संदेश केवल एक शब्द बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने शिक्षा में अवसरों की समानता, अभिभावकों की भागीदारी और विद्यार्थियों के आत्मविश्वास के महत्व को सामने रखा।
