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नई दिल्ली: भारत का कॉर्पोरेट अनुपालन (कॉर्पोरेट कंप्लायंस) परिदृश्य एक बड़े डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सामाजिक सुरक्षा संहिता (COSS) और अपग्रेड किए गए श्रम सुविधा पोर्टल 2.0 (SSP 2.0) के लागू होने से नियोक्ताओं, स्टार्टअप संस्थापकों और एचआर लीडर्स के लिए वैधानिक दायित्वों को संभालना बेहद आसान हो गया है। EPFO, ESIC और राज्य-विशिष्ट नियमों को एक मंच पर लाकर, यह नया ढांचा कागजी कार्रवाई और लालफीताशाही को कम कर रहा है, साथ ही श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा दायरे को बढ़ा रहा है।एक राष्ट्र, एक डिजिटल अनुपालननया SSP 2.0 व्यवसायों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल कमांड转换 सेंटर के रूप में कार्य करता है। “एक राष्ट्र, एक डिजिटल अनुपालन” निर्देश के तहत, कंपनियां अब एक ही इलेक्ट्रॉनिक आवेदन (फॉर्म-I) के माध्यम से EPFO और ESIC पंजीकरण एक साथ कर सकती हैं।इसके अलावा, पोर्टल पर प्रोफेशनल टैक्स (PT) पंजीकरण और राज्यों के दुकान एवं स्थापना अधिनियम (Shops & Establishment Act) लाइसेंस को भी इसी एकल प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है। पुराने अलग-अलग कोड नंबरों को खत्म कर अब हर प्रतिष्ठान को 15-अंकों का विशिष्ट श्रम पहचान संख्या (LIN) दिया जा रहा है। इसके साथ ही, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के पोर्टल (SPICe+ / AGILE-PRO) के माध्यम से पंजीकरण करने वाले नए व्यवसायों का डेटा स्वचालित रूप से श्रम सुविधा बैकएंड के साथ सिंक हो जाएगा।सार्वभौमिक कवरेज और गिग इकोनॉमीश्रमिकों की सुरक्षा के लिए अब न्यूनतम कर्मचारी संख्या की सीमा कोई बाधा नहीं बनेगी। पारंपरिक वैधानिक कर्मचारी सीमा से कम संख्या वाले छोटे व्यवसाय और स्टार्टअप अब रजिस्ट्रेशन विजार्ड के माध्यम से “स्वैच्छिक कवरेज” (वॉलंटरी कवरेज) का विकल्प चुन सकते हैं। एक बार सक्रिय होने के बाद, यह कवरेज स्थायी हो जाता है, जिससे कर्मचारियों को ESI चिकित्सा/नकद देखभाल और EPF सेवानिवृत्ति योजनाओं का समान लाभ मिलता है।गिग (Gig) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे डिलीवरी पार्टनर्स, फ्रीलांसर) के लिए इस अनुपालन ढांचे को दो पोर्टल व्यवस्था में विभाजित किया गया है:• श्रम सुविधा पोर्टल: यह पूरी तरह से व्यवसायों/नियोक्ताओं के पंजीकरण, वार्षिक रिटर्न और कॉर्पोरेट अनुपालन के प्रबंधन के लिए है।• ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल: यह असंगठित श्रमिकों, फ्रीलांसरों और डिलीवरी पार्टनर्स के पंजीकरण के लिए समर्पित राष्ट्रीय डेटाबेस है।सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत, ई-श्रम पंजीकरण को सीधे श्रमिक के स्थायी यूएएन (UAN) से जोड़ा जाता है। इससे ESIC के माध्यम से स्वास्थ्य लाभों की पोर्टेबिलिटी आसान हो जाएगी, जिसका वित्तपोषण एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा अपने टर्नओवर के 1% से 2% के योगदान से किया जाएगा।जोखिम-आधारित पारदर्शिता और निरीक्षणइस नए सुधार में प्रशासनिक पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। विभिन्न श्रेणियों के वार्षिक अनुपालन रिपोर्टों को अब एक एकल डिजिटल फाइलिंग में समेट दिया गया है।सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब भौतिक निरीक्षण (इंस्पेक्शन) पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत जोखिम-मूल्यांकन मॉडल (एल्गोरिदम) द्वारा रैंडम तरीके से तय किए जाएंगे। निरीक्षकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे निरीक्षण के 48 घंटों के भीतर अपनी स्पष्ट रिपोर्ट सीधे नियोक्ता के डैशबोर्ड पर अपलोड करें। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि इस नए इकोसिस्टम को पूरी तरह अपनाने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन यह भारत में ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने में सुगमता) को बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
