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“शुरुआत में कोई खर्च नहीं होता”: सिर्फ 10 लाख रुपये के साथ नई शुरुआत करने पर निखिल कामथ का जवाब
ज़ेरोधा के सह-संस्थापक और भारत के स्टार्टअप व निवेश जगत की जानी-मानी हस्ती निखिल कामथ ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान बताया कि भारत अपनी अगली अर्थव्यवस्था को कैसे मजबूत बना सकता है। निखिल ने स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी, लेकिन अपने भाई नितिन कामथ के साथ मिलकर उन्होंने देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों में से एक ज़ेरोधा खड़ी की। आज वह अपने फाउंड्री के माध्यम से नई पीढ़ी के उद्यमियों को आगे बढ़ने में मदद करते हैं। साथ ही, वह बिज़नेस और टेक्नोलॉजी जगत की बड़ी हस्तियों के साथ एक लोकप्रिय पॉडकास्ट भी होस्ट करते हैं।
निखिल कामथ से पूछा गया कि अगर कल ज़ेरोधा का अस्तित्व खत्म हो जाए और उनके पास सिर्फ 10 लाख रुपये और अपना दिमाग हो, लेकिन किसी से कोई संपर्क न हो, तो वह क्या करेंगे?
इस पर निखिल ने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि ऐसा न हो, क्योंकि जिंदगी मुश्किल हो जाएगी। अगर मेरे पास 10 लाख रुपये हों, तो मैं क्या करूंगा? कंटेंट बनाना उन कुछ कामों में से एक है, जिसे कोई भी कर सकता है। शुरुआत में इसे करने के लिए कोई खर्च नहीं होता। अगर आपको अपने कंटेंट को लोगों तक पहुंचाने का सही माध्यम मिल जाता है, तो उसके आधार पर आप कोई बिज़नेस शुरू कर सकते हैं। यह कंज्यूमर बिज़नेस हो सकता है या कई दूसरे तरह के बिज़नेस भी हो सकते हैं। इसलिए, शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करूंगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मैन्युफैक्चरिंग यानी विनिर्माण का काम समय के साथ तेजी से ऑटोमेटेड हो रहा है। ऐसे में, जो युवा नई स्किल्स सीखने और खुद को बेहतर बनाने की मेहनत करने के बजाय कंटेंट बनाने का रास्ता चुन रहे हैं, उनके लिए इसका क्या मतलब है?
इस पर निखिल कामथ ने कहा, “मुझे लगता है कि किसी चीज़ की अच्छी समझ, उसकी बारीकियों को पहचानने की क्षमता और कंटेंट को लोगों तक पहुंचाने का सही माध्यम ही आपको दूसरों से अलग बनाता है। उदाहरण के लिए, मैं लंबे समय तक एचयूएल और आईटीसी जैसी एफएमसीजी कंपनियों पर नज़र रखता था। इन कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशन काफी ज्यादा थी। लेकिन पिछले एक दशक में उनकी वैल्यूएशन में कमी आई है। वहीं, कई नए ब्रांड, जो कंटेंट या किसी दूसरे माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाने के दम पर आगे बढ़ रहे हैं, तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और उनका कारोबार बढ़ रहा है।
जैसे-जैसे मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ज्यादा लोगों के लिए सुलभ हो रही हैं और इनका इस्तेमाल आम होता जा रहा है, वैसे-वैसे अपनी अलग पहचान बनाना और भी जरूरी हो जाएगा। आपको यह समझना होगा कि आप दूसरों से अलग क्या कर सकते हैं।”
