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संघ के संस्कारों से राजनीतिक नेतृत्व तक का सफर, सारंगपुर के विकास और प्रदेश के युवाओं के लिए समर्पित जीवन
सारंगपुर। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रधर्म, संगठन और जनसेवा के संस्कारों से निर्मित राजनीतिक व्यक्तित्वों में डॉ. गौतम टेटवाल का नाम आज एक सशक्त जनप्रतिनिधि के रूप में लिया जाता है। उनका सार्वजनिक जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थी जीवन से लेकर सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों तथा विधायक और मंत्री के दायित्व तक उनकी यात्रा संघर्ष, समर्पण और सेवा की निरंतर कहानी रही है।
मात्र 14 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर उन्होंने राष्ट्रसेवा की दिशा में पहला कदम बढ़ाया। संघ के स्वयंसेवक के रूप में प्रारंभ हुआ यह सफर आगे चलकर संगठनात्मक जिम्मेदारियों, सामाजिक आंदोलनों और राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचा। वर्ष 1981 में उज्जैन में संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने अपने संगठनात्मक संस्कारों की नींव और मजबूत की।
बाल्यकाल से ही राष्ट्रसेवा का संकल्प
गौतम टेटवाल का सार्वजनिक जीवन विद्यार्थी अवस्था से ही सक्रिय रहा। संघ के कार्यों के साथ उन्होंने सामाजिक संगठनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। शुजालपुर में सह-तहसील कार्यवाह की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने संगठन के विस्तार और समाज के बीच संपर्क को मजबूत किया।
इसके बाद बजरंग दल के जिला संयोजक तथा विश्व हिंदू परिषद के सारंगपुर तहसील संयोजक के रूप में उन्होंने युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को राष्ट्रहित के कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया। संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और समर्पण ने उन्हें धीरे-धीरे एक प्रभावी कार्यकर्ता के रूप में स्थापित किया।
विद्यार्थी राजनीति से नेतृत्व की शुरुआत
विद्यार्थी जीवन में ही उनकी नेतृत्व क्षमता सामने आने लगी थी। वर्ष 1985 में उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सारंगपुर नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद कृषि महाविद्यालय सीहोर में छात्र समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उनके समाधान के लिए संघर्ष किया।
विद्यार्थियों के बीच सक्रिय संवाद, समस्याओं को समझने की क्षमता और समाधान के लिए निरंतर प्रयास उनकी कार्यशैली का हिस्सा बने। यही अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत आधारशिला बना।
राष्ट्रहित के आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी
गौतम टेटवाल के सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित से जुड़े आंदोलनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1992 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान श्री भगवतशरण जी माथुर के नेतृत्व में उन्होंने समयदानी कार्यकर्ता के रूप में सेवा दी और संगठनात्मक जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
डॉ. मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा में सहभागी बनकर श्रीनगर के लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कार्यक्रम में शामिल होना उनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा। वहीं राम जन्मभूमि आंदोलन में अयोध्या पहुंचकर कारसेवा करना तथा शिला पूजन कार्यक्रम के दौरान झांसी में गिरफ्तारी देना उनके राष्ट्रनिष्ठ विचार और संघर्षशील व्यक्तित्व को दर्शाता है।
युवा मोर्चा में संगठन को मजबूत करने का कार्य
भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी गौतम टेटवाल ने लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई। नगर अध्यक्ष और मंडल अध्यक्ष के रूप में उन्होंने युवाओं को संगठन से जोड़ा। वर्ष 1993 से 1995 तक जिला उपाध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन करते हुए उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को गति दी।
उनका मानना रहा कि युवा केवल राजनीति के सहभागी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। इसी विचार के साथ उन्होंने युवाओं को समाज और राष्ट्रसेवा से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया।
भाजपा में बढ़ती संगठनात्मक जिम्मेदारियां
भारतीय जनता पार्टी में भी गौतम टेटवाल ने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। जिला मंत्री, प्रदेश प्रतिनिधि तथा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष सहित अनेक संगठनात्मक जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्होंने पार्टी संगठन को बूथ और गांव स्तर तक मजबूत करने का कार्य किया।
संगठन के प्रति उनकी सक्रियता, कार्यकर्ताओं से संवाद और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचने की कार्यशैली ने उन्हें एक जमीनी नेता के रूप में पहचान दिलाई।
2008 में पहली बार विधायक बने
गौतम टेटवाल के राजनीतिक जीवन में वर्ष 2008 महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया। इसी वर्ष वे पहली बार सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को समझते हुए सड़क, सिंचाई, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी।
विधानसभा क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर आमजन से संवाद करना और स्थानीय समस्याओं को शासन तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा।
2023 में जनता ने फिर जताया विश्वास
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जनता ने एक बार फिर गौतम टेटवाल पर विश्वास जताया और उन्हें सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक निर्वाचित किया।
जनता के विश्वास और उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उन्हें मध्यप्रदेश शासन में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का दायित्व सौंपा गया। मंत्री के रूप में उनका विशेष ध्यान प्रदेश के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने पर रहा है।
युवाओं के कौशल और रोजगार पर विशेष जोर
मंत्री के रूप में डॉ. गौतम टेटवाल की प्राथमिकताओं में प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल से जोड़ना प्रमुख रहा है। उनका प्रयास है कि युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध हों।
कौशल विकास को आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण कड़ी मानते हुए उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों, आईटीआई और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया है।
सारंगपुर विधानसभा में विकास को नई गति
जनप्रतिनिधि के रूप में गौतम टेटवाल के प्रयासों से सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिली है। सिंचाई से लेकर सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और पंचायत स्तर की अधोसंरचना तक अनेक कार्यों को प्राथमिकता दी गई।
सिंचाई से किसानों को मिला संबल
क्षेत्र में जल संसाधनों के विकास की दिशा में अनगा, बारोल और खेरचाखेड़ी में बैराज निर्माण जैसे कार्य महत्वपूर्ण रहे हैं। इनसे किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिली है।
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती पर निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद बढ़ी है और किसानों के लिए कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आधार तैयार हुआ है।
सड़कों से गांवों को जोड़ा
सारंगपुर नगर से गुजरने वाले राष्ट्रीय मार्ग के चौड़ीकरण सहित खजुरियाघाटा-कालापीपल मार्ग और जीरापुर-मंडावता मार्ग जैसे सड़क निर्माण कार्यों ने क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।
विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में प्रमुख सड़कों के निर्माण से गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने तथा आवागमन को सुगम बनाने की दिशा में काम हुआ है।
ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर सुविधाएं बढ़ाने के लिए पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया। 14 पंचायत भवनों के निर्माण से स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों को शासकीय कार्यों के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध हुई।
इसी क्रम में 11 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण कराया गया, जिससे महिला एवं बाल विकास से जुड़ी सेवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा मिल सके।
बिजली व्यवस्था में सुधार
विधानसभा क्षेत्र के जोगीपुरा, बावली और मगराना में 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्रों की स्थापना से बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति न केवल घरेलू जरूरतों के लिए आवश्यक है, बल्कि सिंचाई, छोटे उद्योग, व्यापार और शिक्षा के लिए भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना विकास
शिक्षा को विकास की आधारशिला मानते हुए विद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान दिया गया। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचोर तथा शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारंगपुर में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया गया।
इन सुविधाओं से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने का प्रयास
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कराया गया। बाबइल्या, डाकनी, हराना, करौंदी, मऊ, मुडलालोधा, नैनवाड़ा, सराली और सरेड़ी सहित अनेक स्थानों पर स्वास्थ्य अधोसंरचना विकसित की गई।
इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण आबादी को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं अपने नजदीकी क्षेत्र में उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री अधोसंरचना निधि से विकास को मिला आधार
मुख्यमंत्री अधोसंरचना निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए राशि उपलब्ध कराई गई। इस निधि के माध्यम से विभिन्न आधारभूत संरचनाओं के विकास को गति मिली और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।
सारंगपुर के प्रति विशेष लगाव
सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में गौतम टेटवाल का अपने क्षेत्र के लोगों से निरंतर संपर्क रहा है। गांवों के दौरे, कार्यकर्ताओं से संवाद, आमजन की समस्याओं को सुनना और प्रशासनिक स्तर पर उनके समाधान के प्रयास उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं।
उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि का वास्तविक मूल्य उसके पद से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसकी उपलब्धता और समस्याओं के समाधान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से तय होता है।
परिवार से मिलता है निरंतर संबल
गौतम टेटवाल के सार्वजनिक जीवन में परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रेखा टेटवाल सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उनका निरंतर सहयोग करती रही हैं। उनके पुत्र पृथ्वीराज टेटवाल एवं आकाश टेटवाल तथा पुत्री अवनी टेटवाल उनके पारिवारिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
लगातार सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच परिवार का सहयोग उनके लिए ऊर्जा और संबल का स्रोत रहा है।
संगठन को परिवार मानकर काम करने की शैली
गौतम टेटवाल की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका संगठन के प्रति समर्पण है। लंबे समय तक संगठन में कार्य करने के कारण वे कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और संगठनात्मक अनुशासन को विशेष महत्व देते हैं।
उनकी कार्यशैली में वरिष्ठों का मार्गदर्शन, कार्यकर्ताओं का सम्मान और आमजन से सीधा संवाद प्रमुख दिखाई देता है। यही कारण है कि उनका राजनीतिक सफर केवल चुनावी राजनीति तक सीमित न रहकर संगठनात्मक गतिविधियों से भी निरंतर जुड़ा रहा है।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायी यात्रा
मात्र 14 वर्ष की आयु में संघ से जुड़े एक स्वयंसेवक से लेकर विधायक और मध्यप्रदेश शासन के मंत्री तक का सफर आसान नहीं रहा। इसके पीछे वर्षों का संगठनात्मक अनुभव, संघर्ष, सामाजिक सक्रियता और निरंतर जनसंपर्क रहा है।
गौतम टेटवाल की यात्रा यह संदेश देती है कि सार्वजनिक जीवन में सफलता केवल पद प्राप्त करने से नहीं, बल्कि लंबे समय तक निरंतर कार्य करते रहने से मिलती है।
जनता के सच्चे सेवक के रूप में पहचान
गौतम टेटवाल राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्रसेवा का माध्यम मानते हैं। विद्यार्थी जीवन से शुरू हुई उनकी संगठनात्मक यात्रा आज मंत्री पद तक पहुंच चुकी है, लेकिन उनकी कार्यशैली में जमीनी जुड़ाव और कार्यकर्ता भाव अभी भी दिखाई देता है।
राष्ट्रधर्म, संगठन के संस्कार और जनसेवा को आधार बनाकर आगे बढ़े डॉ. गौतम टेटवाल आज सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
उनकी प्राथमिकताओं में युवा, रोजगार, कौशल विकास, शिक्षा, ग्रामीण विकास और जनकल्याण प्रमुख हैं। आने वाले समय में सारंगपुर विधानसभा और प्रदेश के युवाओं के लिए उनके प्रयास किस दिशा में नई संभावनाएं पैदा करते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
संघ के संस्कारों से शुरू हुई यात्रा, संगठन के संघर्षों से तपकर जनप्रतिनिधित्व तक पहुंची और अब प्रदेश के युवाओं के कौशल एवं रोजगार के लिए समर्पित है—यही डॉ. गौतम टेटवाल के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।
