Aaj ka Panchang 23 October 2026: पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें, नोट कर लें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग
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उज्जैन/नई दिल्ली:
धर्म नगरी उज्जैन समेत पूरे भारत में 4 सितंबर 2026 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। इस वर्ष की जन्माष्टमी बेहद खास रही, क्योंकि ज्योतिषीय गणना के अनुसार ठीक 59 साल बाद (1967 के बाद) सूर्य, चंद्र, बुध, बृहस्पति और शनि के गोचर की पुनरावृत्ति के साथ रोहिणी नक्षत्र और ‘जयंती योग’ का दुर्लभ संयोग बना। मध्य रात्रि 12 बजते ही देश के प्रमुख मंदिरों में नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठे।
उज्जैन के प्रमुख मंदिरों में ऐसे मनाया गया जन्मोत्सव
द्वारकाधीश गोपाल मंदिर (200 साल पुरानी अनोखी परंपरा):
शहर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गोपाल मंदिर को भव्य विद्युत सज्जा से सजाया गया था। यहां सुबह राजभोग आरती के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को 1100 किलो पेड़े का महाप्रसाद अर्पित किया गया। यहां करीब दो शताब्दियों से एक अनूठी परंपरा चली आ रही है, जिसके तहत जन्माष्टमी की आधी रात के बाद भगवान को नवजात बालक मान लिया जाता है। इस मान्यता के चलते बछ बारस तक भगवान की शयन आरती नहीं की जाती है।
भगवान कृष्ण की शिक्षास्थली सांदीपनी आश्रम:
महर्षि सांदीपनि के उस पावन आश्रम में जहां भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा ग्रहण की थी, विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। आश्रम को सुंदर ‘फूल बंगले’ के रूप में सजाया गया था। खराब मौसम और बारिश की संभावना के मद्देनजर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वाटरप्रूफ टेंट और विशेष इंतजाम किए गए थे। रात्रि 12 बजे यहां भव्य जन्म आरती संपन्न हुई।
इस्कॉन मंदिर (ISKCON Ujjain):
इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पर अद्भुत रौनक देखने को मिली। मंदिर को देश-विदेश से मंगवाए गए अलौकिक फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। राधा-कृष्ण, बलराम-सुभद्रा और मदन मोहन स्वरूपों का विशेष श्रृंगार व महाभिषेक किया गया। दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए व्यापक प्रबंध किए गए थे।
देश के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में भी गूंजा जन्मोत्सव
श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा:
भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में अलौकिक उल्लास देखा गया। ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन, गोकुल) में देश-विदेश से करीब 75 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मंगला आरती और मध्य रात्रि के महाभिषेक के दौरान पूरा ब्रजमंडल कृष्णमय हो गया।
बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन:
वृंदावन के सुप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में मध्य रात्रि के ठीक बाद होने वाली मंगला आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ठाकुर जी के अलौकिक दर्शन पाकर भक्त भाव-विभोर हो गए।
द्वारकाधीश मंदिर, गुजरात:
जगत् मंदिर के नाम से विख्यात द्वारका में भगवान रणछोड़राय (द्वारकाधीश) के दर्शन के लिए गुजरात और देश के अन्य हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर को भव्य रोशनी से जगमगाया गया था।
ओडिशा (जगन्नाथ पुरी मंदिर):
पुरी में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य से जुड़ी विशेष परंपरा के तहत मुख्य मंदिर में पांरगत अनुष्ठान संपन्न हुए, जिसमें भगवान को माता देवकी के जन्म प्रसंग के प्रतीकात्मक स्वरूप में पूजा गया।
जन्माष्टमी के इन आयोजनों के बाद अब उज्जैन सहित पूरे देश में नंदोत्सव की धूम शुरू हो चुकी है, जहां जगह-जगह दही-हांडी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
