नई दिल्ली: (ऊषा महाना / माधव एक्सप्रेस)
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने “ई-गवर्नेंस, कनेक्टेड व्हीकल्स और सड़क सुरक्षा तथा परिवहन क्षेत्र पर इनके प्रभाव” विषय पर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल के नेतृत्व में हुई इस बैठक में नीति निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों और परिवहन उद्योग के प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया।
बैठक के मुख्य बिंदु और चर्चाएं
ई-चालान और डिजिटल प्रणालियों में सुधार: बैठक में ई-चालान प्रणाली के दुरुपयोग, ई-ग्रास पोर्टल की तकनीकी समस्याओं, ऑनलाइन लेनदेन की असफलताओं और परमिट डाउनलोड करने में आने वाली कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव महमूद अहमद ने आश्वासन दिया कि मंत्रालय ई-चालान प्रणाली में पारदर्शिता लाने और हित धारकों के सुझावों के आधार पर कमियों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वाहन श्रेणियों और परमिट नियमों में बदलाव: मंत्रालय ने 12 टन तक के हल्के माल वाहनों को परमिट से छूट देने और मध्यम माल वाहन की श्रेणी 12 से 18 टन तक निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, टूरिस्ट बस ऑपरेटरों के लिए ऑथराइजेशन परमिट की न्यूनतम वैधता 5 से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव है।
वी.एल.टी.डी. और तकनीकी मानक: माल वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वी.एल.टी.डी.) से जुड़ी लागत, अलग-अलग एजेंसियों की मांग और वेंडर प्रतिबंधों पर चर्चा हुई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वी.एल.टी.डी. के साथ पैनिक बटन अनिवार्य नहीं है और देश भर में अनुमोदित वेंडरों को समान अवसर देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सड़क सुरक्षा और बस मानक: बसों की संरचनात्मक सुरक्षा के लिए बस बॉडी कोड के नए प्रावधान लागू किए गए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्राइवरों के लिए विश्राम स्थलों, पार्किंग और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. नितिन आर. गोकर्ण और निदेशक सत्येंद्र गर्ग ने एआईएमटीसी द्वारा उठाए गए मुद्दों को महत्वपूर्ण बताते हुए उनकी गंभीरता से जांच करने का निर्देश दिया। एआईएमटीसी ने स्पष्ट किया कि परिवहन क्षेत्र तकनीक और डिजिटल सुधारों का समर्थन करता है, बशर्ते यह नीतियां व्यावहारिक और पारदर्शी हों।