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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने नई औद्योगिक नीति और बड़े निवेश प्रस्तावों के जरिए राज्य में आर्थिक और औद्योगिक विकास का नया युग शुरू किया है, जिसके तहत राजनांदगांव में ईएमसी 2.0 (इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) और मुंगेली में बीईएमएल (BEML) संयंत्र को मंजूरी मिली है। साय सरकार ने औद्योगिक सुधारों, पारदर्शी नीतियों और ऐतिहासिक रियायतों के दम पर देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित कर राज्य में ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव और एमओयू (MoU) सुनिश्चित किए हैं। छत्तीसगढ़ को बड़ी औद्योगिक उपलब्धि मध्य भारत में औद्योगिक क्रांति का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ अब सिर्फ खनिज और कोर सेक्टर (लोहा-सीमेंट) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Electronics Manufacturing) नक्शे पर एक मजबूत केंद्र के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य को औद्योगिक विकास के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने राजनांदगांव जिले के ग्राम पटेवा में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) की स्थापना को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है। यह परियोजना न केवल राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर का चेहरा बदलेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। केंद्र से मिली हरी झंडी, एंकर यूनिट्स ने जताई रुचि भारत सरकार ने EMC 2.0 योजना के तहत इस परियोजना के लिए ₹210.56 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। नवा रायपुर में सफलतापूर्वक स्थापित पहले क्लस्टर के बाद, यह राज्य का दूसरा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर होगा। परियोजना की घोषणा के साथ ही निवेशकों का विश्वास भी देखने को मिल रहा है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की 4 एंकर कंपनियों ने इस क्लस्टर में पहले ही अपनी रुचि दिखाई है। इन एंकर इकाइयों द्वारा लगभग ₹365 करोड़ के प्रारंभिक निवेश का प्रस्ताव प्राप्त हो चुका है।
विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाएं 306.56 एकड़ में फैले इस औद्योगिक पार्क में 150.56 एकड़ क्षेत्र केवल औद्योगिक भूखंडों के लिए आरक्षित किया गया है। उद्योगों को तुरंत कार्य शुरू करने की सुविधा देने के लिए यहाँ निम्नलिखित अधोसंरचनाएं विकसित की जाएंगी: रेडी-बिल्ट फैक्ट्री (RBF) – प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, जिससे कंपनियां तुरंत उत्पादन शुरू कर सकें। अनवरत पावर व वाटर सप्लाई – समर्पित विद्युत उपकेंद्र और जल आपूर्ति नेटवर्क।
लॉजिस्टिक्स व वेयरहाउसिंग – कच्चे माल और तैयार उत्पादों के सुगम परिवहन के लिए आधुनिक गोदाम। क्लीयरेंस – सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां (Clearances) प्राप्त हो चुकी हैं, जिससे परियोजना बिना किसी रुकावट के तुरंत धरातल पर उतरेगी। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना से सृजित होने वाले 9,000 पदों का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के युवाओं को मिले, इसके लिए राज्य सरकार विशेष रणनीति पर काम कर रही है।
‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी मजबूती राजनांदगांव का यह नया इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर राष्ट्रीय स्तर पर ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों में छत्तीसगढ़ के योगदान को कई गुना बढ़ा देगा। सेमीकंडक्टर, ईवी कंपोनेंट्स और स्मार्ट डिवाइस निर्माण में देश की निर्भरता विदेशी आयात पर कम होगी और छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब के रूप में उभरेगा। बीईएमएल संयंत्र से खुलेगा विकास और रोजगार का द्वार छत्तीसगढ़ का मुंगेली जिला अब केवल कृषि आधारित पहचान तक सीमित नहीं रहेगा।
राज्य की साय सरकार के एक रणनीतिक फैसले ने मुंगेली को देश के आधुनिक विनिर्माण और इंजीनियरिंग परिदृश्य पर लाकर खड़ा कर दिया है। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित उपक्रम भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) द्वारा मुंगेली में ‘हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट’ निर्माण संयंत्र स्थापित करने की योजना को राज्य मंत्रिपरिषद से हरी झंडी मिल गई है। सरकार ने पथरिया तहसील के ग्राम चंद्रगढ़ी में 79.70 एकड़ शासकीय भूमि रियायती दर पर बीईएमएल को आबंटित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। यह संयंत्र छत्तीसगढ़ में अपनी तरह का पहला भारी मशीनरी निर्माण संयंत्र होगा।
रायगढ़ और जांजगीर से मुंगेली तक का सफर: एक प्रशासनिक दूरदर्शिता बीईएमएल की यह महत्वाकांक्षी परियोजना शुरुआत में रायगढ़ और जांजगीर-चांपा जिलों के लिए विचाराधीन थी। कंपनी अन्य स्थानों पर उपयुक्त भूमि की तलाश कर रही थी, तभी मुंगेली जिला प्रशासन की तत्परता और दूरदर्शिता ने खेल का रुख बदल दिया। त्वरित सर्वेक्षण: कलेक्टर कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र तथा राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्यवाही की। रणनीतिक स्थान चयन: टीम ने सर्वेक्षण कर चंद्रगढ़ी (पथरिया) में 79 एकड़ से अधिक शासकीय भूमि का चयन किया, जिसकी पहुंच और उपयोगिता का गहन परीक्षण किया गया। उत्कृष्ट कनेक्टिविटी: बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से मात्र 30 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान परिवहन और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद अनुकूल पाया गया। विभागों से त्वरित अनापत्ति (NOC) प्राप्त कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जिसके बाद मंत्रिपरिषद ने इसे स्वीकृति दी। बदल जाएगी आर्थिक और औद्योगिक तस्वीर इस भारी मशीनरी संयंत्र के स्थापित होने से मुंगेली और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सामाजिक-आर्थिक बदलाव देखने को मिलेगा:
1. युवाओं के लिए रोजगार व कौशल विकास स्थानीय युवाओं को न केवल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर मिलेंगे, बल्कि बीईएमएल जैसे शीर्ष उपक्रम के माध्यम से उच्चस्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल संवर्धन का लाभ भी मिलेगा।
2. MSME और सहायक उद्योगों की क्रांति यह संयंत्र केवल एक स्वतंत्र इकाई नहीं होगा, बल्कि एक विशाल औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करेगा। इससे स्थानीय स्तर पर: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) स्पेयर पार्ट्स व मशीन पार्ट्स निर्माण लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन सेवाएँ मेंटेनेंस व सर्विसिंग उद्योग को अप्रत्याशित बढ़ावा मिलेगा।
3. बुनियादी ढाँचे का विस्तार संयंत्र तक सीधी पहुँच मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ाव के कारण क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे और नागरिक सुविधाओं में तेजी से विस्तार होगा। सुशासन से ‘इंडस्ट्रियल हब’ की ओर कदम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का लक्ष्य पारंपरिक खनन और इस्पात उद्योग से आगे बढ़कर उच्च-प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण (High-Tech Manufacturing) का केंद्र बनना है।
