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पटना, 23 जुलाई कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सौजन्य से तथा विश्वा, पटना (वाईटल इन्वेशन औफ सोशल हारमोनी वीथ आर्ट) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय “पटरंगम 2026 – पटना रंग महोत्सव” का आज प्रेमचंद रंगशाला, राजेन्द्र नगर, पटना में भव्य शुभारंभ हुआ। विश्वा, पटना विगत 12 वर्षों से बिहार में रंगकर्म, लोककला, संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े रचनात्मक कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना का प्रसार कर रही है। महोत्सव का उद्घाटन पटना नगर निगम की महापौर श्रीमती सीता साहू ने मुख्य अतिथि के रूप में एवं भारतीय जनता पार्टी, कला संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह जी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर शहर के अनेक रंगकर्मी, साहित्यकार, कलाकार, कला-प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
महोत्सव के प्रथम दिन नुक्कड़ नाटक एवं रंगमंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, न्याय व्यवस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे समकालीन विषयों को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया।
शाम 5:30 बजे आयोजित नुक्कड़ नाटक सत्र में वॉयस फाउंडेशन, पटना ने “पर्यावरण का महत्व” का मंचन किया। नाटक के लेखक एवं निर्देशक विवेक कुमार ओझा हैं। प्रस्तुति में यमराज और चित्रगुप्त के संवादों के माध्यम से बढ़ते प्रदूषण, अंधाधुंध वृक्षों की कटाई तथा पर्यावरण के प्रति मानवीय लापरवाही के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। स्वच्छता, वृक्षारोपण और सामूहिक जनभागीदारी का संदेश देते हुए नाटक ने दर्शकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। वहीं पर्यावरण और वृक्षारोपण पर आधारित मधुर गीत ने प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली एवं आकर्षक बना दिया।
इसके उपरांत शाम 6:30 बजे क्रिएशन, पटना द्वारा प्रसिद्ध नाटककार शंकर शेष लिखित चर्चित नाटक “आधी रात के बाद” का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी उत्तम कुमार ने किया। यह प्रस्तुति कानून व्यवस्था, न्याय प्रणाली और नैतिक मूल्यों के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से दर्शकों के सामने प्रस्तुत करती है।
नाटक की कहानी एक जज और एक चोर के बीच होने वाले संवाद पर आधारित है, जिसके माध्यम से कानून की सीमाओं और वास्तविक न्याय के बीच के अंतर को रेखांकित किया गया। यह प्रस्तुति दर्शकों को यह सोचने पर विवश करती है कि क्या हर कानूनी निर्णय वास्तव में न्यायपूर्ण होता है। निर्देशक उत्तम कुमार ने समकालीन संदर्भों के साथ इस कालजयी नाटक को नई दृष्टि और प्रासंगिकता प्रदान की।
मंच पर गौतम कुमार, अभिषेक आनंद एवं अभिषेक शर्मा ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। वहीं नेपथ्य में रोशन कुमार की प्रभावशाली प्रकाश परिकल्पना तथा रंजीत कुमार के ध्वनि संचालन ने प्रस्तुति को और अधिक सशक्त एवं प्रभावपूर्ण बनाया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने बताया कि 24 एवं 25 जुलाई को भी महोत्सव के अंतर्गत बिहार के विभिन्न रंग समूहों द्वारा विविध सामाजिक, सांस्कृतिक एवं समकालीन विषयों पर आधारित रंगमंचीय और नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुतियाँ की जाएँगी। महोत्सव के प्रथम दिन बड़ी संख्या में रंगकर्मियों, कला-प्रेमियों एवं दर्शकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली।
