Aaj ka Panchang 31 October 2026: पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें, नोट करें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग
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Spread the loveइंदौर। वाणी साहित्य उत्सव के मंच...
निःशुल्क स्वास्थ्य एवं शिक्षा, किसानों को एमएसपी, जल-पर्यावरण संरक्षण और युवाओं को रोजगार सहित पाँच सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करेगी परिषद।पूर्व मंत्री व सहकारिता नेता स्वर्गीय रामेश्वर पटेल की दूरदृष्टि और विचारों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ सत्यनारायण पटेल के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी अभियान की तैयारी।इंदौर, मध्यप्रदेश। मालवा की समृद्धि, जनकल्याण और सुनियोजित विकास के उद्देश्य से गठित मालवा विकास परिषद इंदौर जनजागरण अभियान की शुरुआत करेगी। परिषद का उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान कल्याण, जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा युवा रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनसंवाद के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं और अपेक्षाओं को शासन तक पहुँचाना है। परिषद अपनी पाँच सूत्रीय मांगों को लेकर आगामी समय में मालवा सहित मध्यप्रदेश और देश के व्यापक जनहित में अभियान चलाएगी।परिषद की स्थापना की परिकल्पना मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री व सहकारिता नेता स्वर्गीय श्री रामेश्वर पटेल ने की थी। परिषद की नींव 5 जनवरी 1980 को रखी गई थी। उनकी सोच मालवा क्षेत्र की आवश्यकताओं को समझते हुए ऐसी विकास योजनाएँ तैयार करने की थी, जिनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। अब उनके विचारों और जनकल्याणकारी उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी परिषद के अध्यक्ष, इंदौर जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक तथा किसान नेता सत्यनारायण पटेल ने संभाली है। श्री राधेश्याम पटेल के संरक्षण में परिषद अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगी।*स्वर्गीय रामेश्वर पटेल की दूरदृष्टि को आगे बढ़ाने का संकल्प*मालवा क्षेत्र लंबे समय से जल संकट और सिंचाई संबंधी चुनौतियों का सामना करता रहा है। वर्ष 1970 में नर्मदा का पानी लाने को लेकर इंदौर के राजबाड़ा पर जो जन-आंदोलन हुआ था, उस आंदोलन में रामेश्वर पटेल भी सम्मिलित होकर सहभागी रहे थे। उसके पश्चात जल समस्या की गंभीरता को समय रहते पहचानते हुए स्वर्गीय श्री रामेश्वर पटेल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह के समक्ष नर्मदा नदी के जल को मालवा की आवश्यकताओं से जोड़ने की परिकल्पना रखी थी। जल प्रबंधन के लिए अलग विभाग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया था। आगे चलकर नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के माध्यम से मालवा में जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कार्य हुआ।*स्वर्गीय रामेश्वर पटेल का नारा “नर्मदा लाओ, मालवा बचाओ”,* आज भी क्षेत्र की जल आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। परिषद का मानना है कि बदलती परिस्थितियों और बढ़ती आबादी को देखते हुए जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, वर्षाजल संचयन, तालाबों का संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है।*“वर्ष 2002 में नदी जोड़ो अभियान को लेकर कांवड़ यात्रा”*वर्ष 2002 परिषद द्वारा भारत में पहली नदी जोड़ो (लिंक) योजना को लेकर श्री रामेश्वर पटेल जी के मार्गदर्शन में व तत्कालीन इंदौर-5 के विधायक सत्यनारायण पटेल के नेतृत्व में ओंकारेश्वर (नर्मदा तट) से उज्जैन रामघाट (क्षिप्रा तट) तक कांवड़ यात्रा निकाली। इस यात्रा का उद्देश्य मालवा की क्षिप्रा, गंभीर, चंबल, कालीसिंध व अन्य नदियों को नर्मदा नदी से जोड़ना था। जिसमें हजारों किसान, युवा व साथी सम्मिलित हुए। कांवड़ पद यात्रा का उद्देश्य था इस बार नर्मदा नदी का जल कांवड़ से व आने वाले वर्षों में नहरों या पाइप लाइन से नदियों तक पहुंचाना था। श्रावण माह में निकाली यात्रा में पर्यावरण संरक्षण हेतु कांवड़ में चलने वाले लोगों द्वारा रास्तेभर फलदार, छायादार पौधे के बीज भी खाली जगहों पर डाले गए। संभवतः यह सबसे बड़ी कांवड़ पद यात्रा थी।*वर्ष 2006 में मालवा विकास यात्रा के माध्यम से दिल्ली तक पहुँची थी आवाज…*मालवा विकास परिषद ने वर्ष 2006 में सत्यनारायण पटेल के नेतृत्व में मालवा सहित इंदौर जिले के लगभग 450 किसानों, युवाओं और अन्य साथियों के साथ दिल्ली तक पहुँचकर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से मुलाकात कर फसलों के उचित मूल्य, सिंचाई, किसानों की कर्ज संबंधी समस्याओं, जल प्रबंधन और शहरी विकास के लिए बजट प्रावधान जैसे मुद्दे रखे गए थे। परिषद के अनुसार उस दौरान उठाई गई कई मांगों पर विचार कर उन्हें पूरा करने की दिशा में कदम उठाए गए थे।*पाँच सूत्रीय मांगों को लेकर चलेगा जनजागरण अभियान*परिषद का मानना है कि स्वस्थ नागरिक, शिक्षित समाज, समृद्ध किसान, रोजगार के अवसरों से युक्त युवा और सुरक्षित पर्यावरण ही विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव हैं। इसी सोच के साथ परिषद ने पाँच प्रमुख विषयों पर अपनी मांगें तैयार की हैं। *1. देशभर में निःशुल्क एवं सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएँ-*परिषद की मांग है कि प्रत्येक नागरिक को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए व्यापक सरकारी स्वास्थ्य योजना लागू की जाए। आवश्यक जाँच, दवाइयाँ, भर्ती, ऑपरेशन एवं उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित हो। सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक, नर्स, आधुनिक उपकरण और दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाएँ। गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सस्ती सरकारी मेडिक्लेम योजना शुरू हो, तथा दुर्घटना, गंभीर बीमारी या प्राकृतिक आपदाओं से निजी अस्पताल में मरीज की मृत्यु होने पर बकाया चिकित्सा राशि के भुगतान की जिम्मेदारी सरकार सुनिश्चित करे। *2. देशभर में निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा-* परिषद समान अवसरों के साथ निःशुल्क शिक्षा और उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग करती है। शिक्षा व्यवस्था को रोजगारपरक बनाते हुए कंप्यूटर तकनीकी ज्ञान, स्वरोजगार, कृषि, पशुपालन और स्थानीय व्यवसायों से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण दिया जाए। विद्यार्थियों पर अनावश्यक किताबी बोझ कम करने के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण, जल संरक्षण और नशामुक्ति जैसे विषयों को भी बढ़ावा दिया जाए एवं पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए।*3. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि का लाभकारी स्वरूप-* परिषद की मांग है कि किसानों को उनकी उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य मिले और डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की प्रमुख सिफारिशों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार तत्काल समयबद्ध कार्ययोजना बनाएं। खाद,बीज की पर्याप्त उपलब्धता, कृषि लागत में कमी, आधुनिक तकनीक सिंचाई और बिजली की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मध्यप्रदेश में राज्य किसान आयोग गठित हो, भूमि अधिग्रहण पर उचित मुआवजा मिले, गौशाला तथा पशुपालन, कृषि आधारित उद्योग, भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया जाए। वनवासी आदिवासी और अनुसूचित जाति (एस.सी.) के लोगों को जीवन यापन के लिये दिये गये रहवासी एवं कृषि भूमि पट्टो से अवैध बेदखली पूरी तरह से गैर कानूनी है, इस पर सरकार विशेष ध्यान दे । शासन द्वारा वंचित समुदायों को भूमि और आजीविका के अधिकार सुरक्षित रखे जावें । मालवा क्षेत्र के लिए विशेष मालवा कृषि एवं किसान समृद्धि योजना बनाने की मांग भी की गई है।*4. जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना का विस्तार-* परिषद मालवा की बढ़ती घरेलू, कृषि एवं औद्योगिक जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की मांग करती है। नर्मदा के जल से इंदौर के लिम्बोदी, बिलावली, पिपल्यापाला, सिरपुर, यशवंत सागर, बनेड़िया सहित अन्य तालाबों को जोड़ने की संभावनाओं का तकनीकी अध्ययन कर कार्ययोजना बनाई जाए। मालवा एवं प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के तालाबों और जलस्रोतों जैसे पारंपरिक कुओं, बावडियों आदि के संरक्षण, नदियों के जल के समुचित उपयोग, वर्षाजल संचयन तथा भूजल स्तर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। परिषद नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना के जैसे, नर्मदा से गंभीर नदी, चम्बल नदी, कालीसिंध व अन्य नदियों को जोड़ने की मांग करती है। नदियों की स्थिति का अध्ययन करने और जल संरक्षण के प्रति जनजागरण के उद्देश्य से परिषद सदस्यों के साथ विभिन्न क्षेत्रों का दौरा भी करेगी। साथ ही परिषद पर्यावरण सरंक्षण हेतु पौधा रोपण का सघन अभियान चलाएगी।*इसके साथ परिषद देश की राष्ट्रीय नदी गंगा एवं उनकी सहायक नदी गोमती, महानंदा, यमुना, रामगंगा, गंडक, बेतवा, केन, दामोदर व अन्य नदियों की सफाई और संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा करने तथा नदी संरक्षण को व्यापक राष्ट्रीय अभियान का रूप देने की मांग करेगी।**5. बेरोजगार युवाओं एवं युवतियों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर-*परिषद की मांग है कि जिला एवं तहसील स्तर पर कौशल विकास केंद्रों और प्रशिक्षण शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए। जिला रोजगार केंद्रों का आधुनिकीकरण कर बेरोजगार युवाओं का नियमित पंजीकरण किया जाए तथा उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित हो। नियमित रोजगार मेले, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, स्वरोजगार के लिए आसान ऋण एवं प्रशिक्षण और पारंपरिक व क्षेत्रीय व्यवसायों को प्रोत्साहन दिया जाए। पेंटर, वेल्डर, ड्राइवर, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर व अन्य हुनरमंद श्रमिकों के लिए कम ब्याज पर ऋण, बीमा और पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था हो। परिषद मालवा के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता देने के लिए प्रभावी नीति बनाने की भी मांग करेगी।*जनभागीदारी से शासन तक पहुंचेगी आमजन की आवाज :-*परिषद के अनुसार जल संकट का सीधा प्रभाव कृषि और पर्यावरण पर पड़ता है। शिक्षा एवं कौशल की कमी युवाओं के रोजगार को प्रभावित करती है और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ाता है। इन समस्याओं का समाधान अलग-अलग प्रयासों के बजाय समन्वित विकास नीति के माध्यम से से किया जाना आवश्यक है।इन कार्यक्रमों के माध्यम से समस्याओं का अध्ययन कर मांगों को संबंधित विभागों एवं शासन के समक्ष रखा जाएगा। परिषद का प्रयास रहेगा कि जनहित के विषयों को दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर देखा जाए और जनभागीदारी के माध्यम से ठोस समाधान तलाशे जाएं।*जनहित से राष्ट्रहित तक का संकल्प*मालवा विकास परिषद लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यमों से अपनी मांगों को आगे बढ़ाएगी। परिषद सरकार से आग्रह करेगी कि पांच सूत्रीय मांगों को विकास की प्राथमिकताओं में शामिल कर उन पर समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
