नमित मल्होत्रा की ‘रामायण’ और जियोहॉटस्टार ने मिलाया हाथ, भारत के सबसे बड़े महाकाव्य को डिजिटल माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में की नई पहल
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नई दिल्ली,। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कानूनी पेशे से जुड़े युवाओं को सोशल मीडिया और ऑनलाइन विजिबिलिटी को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली लोकप्रियता या ध्यान आकर्षित करने को किसी वकील को अपनी वास्तविक सफलता नहीं माननी चाहिए। कानूनी पेशे में असली सम्मान, स्थायी पहचान और सफलता कोर्ट रूम के भीतर की गई कड़ी मेहनत, लगन और बनाई गई क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) से मिलती है, न कि किसी डिजिटल मंच या ऑनलाइन टीआरपी से।
सीजेआई सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) द्वारा 2025 बैच के नए एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) वकीलों के सम्मान में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया के माध्यम से चर्चित होना और ध्यान खींचना बेहद आसान है, लेकिन यह कभी भी अदालत की विश्वसनीयता का स्थान नहीं ले सकता। वकीलों को टीवी चैनलों की तरह टीआरपी के पीछे भागने और अपनी सफलता को ऑनलाइन लोकप्रियता से मापने के लालच से बचना चाहिए। उन्होंने युवा वकीलों को करियर के शुरुआती दिनों में बड़ी लॉ फर्म खोलने के बजाय अपनी वकालत की कला को निखारने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिग्रियां और पद केवल अवसर का दरवाजा खोलते हैं, लेकिन एक सफल करियर काम की गुणवत्ता से ही बनता है।
अपने शुरुआती करियर के अनुभवों को साझा करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि याचिकाओं और कानूनी दस्तावेजों की बेहतर ड्राफ्टिंग ही इस वकालत की आत्मा है। उन्होंने युवा वकीलों से प्रत्येक याचिका को एक ऐसे प्रभावशाली आख्यान के रूप में तैयार करने का आग्रह किया कि जज शुरू से अंत तक उससे जुड़े रहें। इसके साथ ही, सीजेआई ने कानूनी ड्राफ्टिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि एआई केवल शोध और संदर्भ का एक साधन हो सकता है, लेकिन यह कभी भी वकील की अपनी समझ और मानवीय बुद्धि का विकल्प नहीं बन सकता। मुवक्किल अपना मामला एक इंसान को सौंपता है, मशीन को नहीं। एआई को केवल एक कार्यालय सहायक के रूप में रखें और अपनी सोचने-समझने की क्षमता पर हावी न होने दें। अंत में उन्होंने वकीलों से पूरी ईमानदारी के साथ गरीब और वंचित वर्ग के मुवक्किलों को कानूनी सहायता (लीगल एड) प्रदान करने की अपील भी की।
