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भिलाई। आधुनिक शिक्षा एवं शोध कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका को देखते हुए श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च जुनवानी भिलाई में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क एआई एवं रिसर्च टेक्नोलॉजी जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में *प्राचार्य डॉ. हेमंत बडवाईक*, विभागाध्यक्षों (एचओडी), प्राध्यापकों, पीएच.डी. शोधार्थियों, एम.फार्म एवं बी.फार्म के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यशाला का संचालन *ई डिजी केंद्र* की संस्थापक *एकता ठाकुर* द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि किस प्रकार एआई का उपयोग रिसर्च एवं अकादमिक क्षेत्र में प्रभावी रूप से किया जा सकता है। कार्यशाला में थीसिस लेखन, रिसर्च पेपर तैयार करने, लिटरेचर रिव्यू, डेटा विश्लेषण, रेफरेंस मैनेजमेंट, प्रेजेंटेशन तैयार करने, लेक्चर प्लानिंग, अध्ययन सामग्री निर्माण, जीपैट (GPAT) परीक्षा की तैयारी, वैज्ञानिक लेखन, समय प्रबंधन, शोध पत्रों की गुणवत्ता सुधारने, शोध के लिए विश्वसनीय स्रोत खोजने तथा शोध कार्यों में एआई टूल्स के जिम्मेदार एवं नैतिक उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही एआई से प्राप्त जानकारी का सत्यापन (फैक्ट चेकिंग) तथा अकादमिक ईमानदारी बनाए रखने के महत्व पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में *ई डिजी केंद्र* की मैनेजर *सेजल* तथा प्रशिक्षु सदस्य *श्वेता, तनिष्का, सौम्या, समृद्धि एवं तोशिका* ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। संस्था का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना ही नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक फील्ड अनुभव प्रदान कर उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना भी है।
गौरतलब है कि *ई डिजी केंद्र*, जो डिजिटल मार्केटिंग एवं आधुनिक तकनीकी समाधानों के माध्यम से व्यवसायों को विकास की दिशा प्रदान करता है, अपनी प्रशिक्षण इकाई *ई डिजी अकादमी* के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों एवं शैक्षणिक संस्थानों में निःशुल्क एआई जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को भविष्य की तकनीकों से परिचित कर उन्हें शिक्षा, अनुसंधान एवं पेशेवर जीवन में एआई का प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग करने के लिए सक्षम बनाना है।
इस अवसर पर एकता ठाकुर ने कहा कि आने वाले समय में एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक के लिए आवश्यक कौशल बन जाएगा। यदि शिक्षा संस्थानों में समय रहते एआई के सही, सुरक्षित और नैतिक उपयोग की समझ विकसित की जाए, तो शोध कार्यों की गुणवत्ता, शिक्षण प्रक्रिया और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि *ई डिजी अकादमी* का उद्देश्य प्रदेश के अधिक से अधिक शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँचकर विद्यार्थियों और शिक्षकों को निःशुल्क एआई जागरूकता के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य *डॉ. हेमंत बडवाईक*, विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ उच्च शिक्षा, शोध एवं आधुनिक शिक्षण पद्धति को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने भी एआई आधारित शिक्षण एवं रिसर्च टूल्स को लेकर विशेष उत्साह व्यक्त किया तथा भविष्य में ऐसे और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई।
*फोटो कैप्शन:*
श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च, जुनवानी, भिलाई में आयोजित निःशुल्क एआई एवं रिसर्च टेक्नोलॉजी कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को संबोधित करतीं *ई डिजी केंद्र* की संस्थापक *एकता ठाकुर*। इस अवसर पर *प्राचार्य डॉ. हेमंत बडवाईक*, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण, पीएच.डी. शोधार्थी, एम.फार्म एवं बी.फार्म के विद्यार्थी उपस्थित रहीं।
