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मुंबई, 18 जुलाई, 2026 – एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) ने आज यूनिट धारक की मृत्यु के बाद यूनिट/ धनराशि के दावे से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की। एएमएफआई इस बदलाव के साथ म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन प्रक्रिया को आसान बनाना चाहता है। ये बदलाव विशेष रूप से परिचालन संबंधी परेशानियों को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं कि निवेशक की मृत्यु होने की स्थिति में नामित व्यक्ति आसानी से यूनिट/ धनराशि पर दावा कर सकें।
ये बदलाव हाल की उन बाज़ार रिपोर्ट के बाद आए हैं जिनमें दावा प्रक्रिया के दौरान शोकग्रस्त परिवारों को होने वाली प्रशासनिक दिक्कतों, विशेष रूप से दस्तावेज से जुड़ी छोटी-मोटी गलतियों के कारण होने वाली परेशानी का ज़िक्र किया गया था। निवेशकों के हितों की रक्षा के नियामकीय लक्ष्यों के अनुरूप, एएमएफआई ने यूनिट धारक की मृत्यु के बाद यूनिट/धनराशि के दावे से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव किया है ताकि निवेशकों के लाभ के लिए ये उपाय लागू किए जा सकें:
• पता बदलने के स्थिति से जुड़ा समाधान: जिन मामलों में मृतक यूनिट धारक के दस्तावेजों में दर्ज पते अलग हैं, वैसी स्थिति में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को अब सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम पते की जानकारी पर भरोसा करें, बशर्ते नए पते से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हों।
• नाम और हस्ताक्षर में फर्क के लिए एक जैसा ढांचा: यूनिट धारक के नाम या हस्ताक्षर में फर्क की समस्याओं से निपटने के लिए, विभिन्न एएमसी नाम और हस्ताक्षर के लिए छोटी-बड़ी गलतियों से जुड़ी वैसे ही नियमों का पालन कर सकती हैं जैसा कि सेबी के 06 फरवरी, 2026 के मास्टर सर्कुलर के तहत आरटीए के लिए एनेक्सर-10 में बताया गया है।
नए एसओपी दिशानिर्देश सभी सदस्य एएमसी को जारी कर दिए गए हैं और ये तुरंत लागू हो गए हैं।
एएमएफआई ने इन बदलावों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद के लिए, एएमसी के ज़रिये प्रशिक्षण पहल शुरू करने का प्रस्ताव किया है ताकि नई प्रक्रिया को एक जैसा लागू किया जा सके और नियामकीय दिशानिर्देश का पालन हो सके।
