नगर निगम राजस्व विभाग को निर्देश: भारी अमले के साथ अचानक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में न घुसें अधिकारी, राजस्व वसूली का उद्देश्य डराना नहीं
रायपुर।
रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर मीनल चौबे ने निगम के राजस्व विभाग, सभी जोनों के सहायक राजस्व अधिकारियों और राजस्व उपायुक्त डॉ. अंजलि शर्मा की टीम को राजस्व वसूली के संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। महापौर ने स्पष्ट किया है कि व्यापारियों और करदाताओं की गरिमा का सम्मान करना प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों का मूल कर्तव्य है।
महापौर ने कहा कि किसी भी व्यापारी के साथ व्यावसायिक समय पर, ग्राहकों की उपस्थिति में राजस्व वसूली के लिए अभद्र या अशालीन व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। नगर निगम का उद्देश्य नियमानुसार राजस्व वसूली होना चाहिए, व्यापारियों को डराना या परेशान करना नहीं।
निगम प्रशासन के लिए प्रमुख निर्देश:
पूर्व सूचना और शालीनता: राजस्व अमला जब भी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में वसूली के लिए जाए, तो संबंधित व्यापारियों को पूर्व में सूचित करे।
सहमति से पुनर्मूल्यांकन: करों के पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) की कार्यवाही संबंधित पक्ष की सहमति और नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए अत्यंत शालीन व्यवहार के साथ की जाए।
अचानक दबिश पर रोक: ग्राहकों की मौजूदगी में नगर निगम के विभिन्न विभागों का एक साथ भारी टीम लेकर अचानक पहुँचना उचित नहीं है। इससे व्यापारियों के व्यावसायिक मान-सम्मान पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
महापौर ने रेखांकित किया कि शहर की अर्थव्यवस्था यहाँ के नागरिकों और व्यापारियों के सहयोग से संचालित होती है। ऐसे में निगम प्रशासन का कार्य जनता को सहूलियत देना और उनका सहयोग करना है, न कि उन्हें किसी प्रकार के मानसिक तनाव या अवसाद में डालना।