नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास और पर्यटन की नई पहचान बनाएगा: गृह मंत्री अमित शाह
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नई दिल्ली । भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन मंगलवार को कजाकिस्तान से सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए सफलतापूर्वक रवाना हो गए हैं। उनके साथ दो रूसी अंतरिक्ष यात्री, प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी इस आठ महीने लंबे मिशन का हिस्सा हैं। यह अंतरिक्ष यान भारतीय समयानुसार रात 8 बजकर 17 मिनट पर बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से प्रक्षेपित हुआ और पृथ्वी के दो चक्कर लगाने के बाद, रात 11 बजकर 56 मिनट पर स्वत: स्टेशन के प्रिचाल मॉड्यूल से जुड़ गया। यह अनिल मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा है, जबकि उनके रूसी सहयात्री दूसरी बार अंतरिक्ष मिशन पर गए हैं।
प्रक्षेपण के दौरान अनिल मेनन की अंतरिक्ष यात्री पत्नी अन्ना विल्हेम समेत उनके परिवार के सदस्य और नासा के प्रशासक जेरेड आइज़ैकमैन बैकोनूर कॉस्मोड्रोम में मौजूद थे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनकर उनका उत्साह बढ़ाया। अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने के बाद, ये तीनों यात्री नासा के अंतरिक्ष यात्रियों (जेसिका मीर, जैक हैथवे और क्रिस विलियम्स), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनोट, और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री सर्गेई कुद-स्वेर्चकोव, सर्गेई मिकाएव और आंद्रेई फेद्यायेव के साथ मिलकर मिशन को आगे बढ़ाएंगे। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य लगभग आठ महीने तक अंतरिक्ष में रहकर वैज्ञानिक अनुसंधान करना और नई प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना है, जिसका लक्ष्य मानव अंतरिक्ष अन्वेषण को आगे बढ़ाना और पृथ्वी पर जीवन को लाभ पहुंचाने वाली तकनीकों का विकास करना है। तीनों की अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर वापसी निर्धारित है। रूस की अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सहयोग एजेंसी की प्रमुख येलेना रेमिज़ोवा ने बताया कि इस रॉकेट के साथ भारतीय स्कूली बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकृतियां भी अंतरिक्ष में भेजी जा रही हैं, जो एक प्रतीकात्मक और प्रेरक कदम है। अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में यूक्रेनी और भारतीय मूल के प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। वह पेशे से इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन हैं और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर कार्यरत हैं। अमेरिकी वायुसेना में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम के तहत अफगानिस्तान में अग्रिम मोर्चे पर काम किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ जुड़कर माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों को चिकित्सा सहायता प्रदान की है। उन्होंने रोटरी एम्बेसडोरियल स्कॉलर के रूप में भारत में एक वर्ष बिताया था, जहाँ उन्होंने पोलियो टीकाकरण अभियान का अध्ययन और उसमें सहयोग किया।
