छत्तीसगढ़ में संपत्ति की मालकिन बन रही महिलाएं, आर्थिक सशक्तिकरण को मिली नई मजबूती
Spread the loveमुख्यमंत्री साय की पहल का असर: महिलाओं के नाम संपत्ति...
Spread the loveमुख्यमंत्री साय की पहल का असर: महिलाओं के नाम संपत्ति...
Spread the loveजैव ऊर्जा बनेगी छत्तीसगढ़ की ऊर्जा सुरक्षा और हरित अर्थव्यवस्था...
Spread the love दुर्ग, 21 अगस्त 2026/ जिले के भिलाई नगर स्थित जयंती स्टेडियम...
इंदौर, मिताशा फाउंडेशन एवं डायोसिस ऑफ इंदौर के संयुक्त नेतृत्व में, केरल समाजम, रोटरी क्लब ऑफ इंदौर आदर्श एवं एसवीडी सोसायटी के सहयोग से आयोजित “संकल्प एक लाख अंगदान से जीवनदान” जनजागरूकता कार्यक्रम में शनिवार को सामाजिक सहभागिता और मानव सेवा का प्रेरक स्वरूप देखने को मिला। कार्यक्रम में लगभग 450 नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर चिकित्सकों, शिक्षाविदों, धर्मगुरुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं तथा समाज के विभिन्न वर्गों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
इस व्यापक जनजागरण अभियान को सफल बनाने में डायोसिस ऑफ इंदौर के कैथोलिक बिशप थॉमस मैथ्यू की दूरदर्शी एवं प्रेरणादायी भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं को इस अभियान से जोड़ते हुए अंगदान के संदेश को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उपस्थित सभी वक्ताओं ने कहा कि अंगदान केवल एक दान नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने वाला सर्वोच्च मानवीय कार्य है और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है।
इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी ने अपने संबोधन में कहा कि देश में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना आज की सबसे बड़ी सामाजिक जरूरत है। उन्होंने नागरिकों से स्वयं आगे आकर अंगदान का संकल्प लेने तथा इस संदेश को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने मिताशा फाउंडेशन एवं डायोसिस ऑफ इंदौर द्वारा संचालित इस जनजागरण अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण केरल से विशेष रूप से इंदौर पहुंचे फादर डेविस चेरमेल रहे। उन्होंने केवल अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम में भाग लिया। अपने प्रेरक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जागरूकता, संवेदनशीलता और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से हजारों लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम को पूर्व अधिष्ठाता एमजीएम मेडिकल कॉलेज डॉ. संजय दीक्षित, डॉ. शारदा, एसवीडी के वाइस प्रोविंशियल रेव. फादर पायस सिरिएक एसवीडी तथा श्री मैथ्यू अब्राहम सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने अंगदान से जुड़े भ्रमों और मिथकों को दूर करने पर जोर देते हुए इसे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही अंगदान को जनआंदोलन में बदलने की सबसे बड़ी शक्ति है।
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी सत्र वास्तविक जीवन के अनुभवों का रहा। अभिजीत राठौर ने अपनी बहन अभिजिता राठौर से जुड़े अंगदान के अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस घटना ने उनके जीवन की सोच बदल दी और उन्हें अंगदान जागरूकता का संदेशवाहक बनने की प्रेरणा मिली। इसी क्रम में वेदिका आचार्य ने, जिन्होंने एक किडनी डोनर के रूप में जीवनदान का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है, अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को नया जीवन देने से बड़ा संतोष दुनिया में कोई नहीं हो सकता।
मिताशा फाउंडेशन के श्री आलोक सिंगी ने भी अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने हाल ही में अपने दिवंगत पिता की नेत्र एवं त्वचा दान की प्रक्रिया अपनाकर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अंग एवं ऊतक दान किसी व्यक्ति के जीवन का अंतिम लेकिन सबसे महान उपहार हो सकता है, जो किसी अन्य के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है।
श्री आलोक सिंगी ने इस अभियान के प्रमुख संयोजक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व, सतत समन्वय, दूरदृष्टि और अथक प्रयासों से इस विशाल जनजागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन संभव हो सका। विभिन्न संस्थाओं, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाकर अंगदान को जनआंदोलन बनाने की दिशा में उनका योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी नागरिकों ने सामूहिक रूप से “संकल्प एक लाख अंगदान से जीवनदान” अभियान को जन जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने बताया कि एक अंगदाता आठ लोगों को नया जीवन दे सकता है तथा अनेक अन्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार ला सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान केवल एक निर्णय नहीं, बल्कि मानवता के प्रति सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाने का अवसर है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं, स्वयंसेवकों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया गया। मिताशा फाउंडेशन ने प्रदेशभर में जागरूकता अभियान चलाकर एक लाख अंगदान संकल्प का लक्ष्य प्राप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम के समापन पर वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि “अंगदान महादान है। आपके जाने के बाद भी आपकी धड़कन, आपकी आंखें और आपके अंग किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन सकते हैं।”
