अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट चढ़ावा चोरी मामले, आरोपियों के जेल जाने और दो महत्वपूर्ण ट्रस्टियों के त्यागपत्र के बाद अब एक बड़े पुनर्गठन की तैयारी हो रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में न केवल ट्रस्ट के पुनर्गठन की आवश्यकता जाहिर की है, बल्कि किसी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह सब 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है, जहां इन प्रमुख मुद्दों पर निर्णय होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार भी इस बीच सीईओ की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय ले सकती है, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेश लौटने के बाद इस पर फैसला हो सकता है। महासचिव चंपतराय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने विभिन्न आरोपों और मीडिया व संघ-विहिप के दबाव के चलते पीएमओ के निर्देश पर अपने त्यागपत्र सौंप दिए हैं। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि की है, यह भी बताया कि बैठक में इन इस्तीफों पर विचार किया जाएगा।
जांच एजेंसी एसआईटी की सिफारिशों के बाद ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र का नाम पहले से ही सामने था, अब पूर्व अयोध्या जिलाधिकारी और 2005 बैच के आईएएस योगेश्वर राम मिश्र का नाम प्रमुखता से चर्चा में है, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य लोकसेवा अधिकरण में सदस्य (प्रशासनिक) के पद पर कार्यरत हैं। हालांकि, सीईओ की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट की उपविधि (बायलाज) में परिवर्तन आवश्यक होगा, क्योंकि वर्तमान नियमावली में पद का कोई प्रावधान नहीं है। यदि दोनों ट्रस्टियों के त्यागपत्र स्वीकृत होते हैं, तब ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हो जाएंगे, क्योंकि अयोध्या राज परिवार के मुखिया बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से एक पद पहले से खाली है। इसके अतिरिक्त, अध्यक्ष महांत नृत्यगोपालदास और सदस्य के.परासरण सहित कुछ अन्य ट्रस्टी स्वास्थ्य और अधिक आयु के कारण सक्रिय नहीं हैं, और बैठकों में भी वे ऑनलाइन ही जुड़ पाते हैं। इसके बाद यदि ट्रस्ट का पुनर्गठन होता है, तब इन स्थानों पर भी नए और अधिक सक्रिय सदस्यों की नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है, जिससे राम मंदिर के कार्यों में पारदर्शिता और नई ऊर्जा आ सके।
