नई दिल्ली,। राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में देशभर से आए लगभग 4,000 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में कर व्यवस्था, जीएसटी अनुपालन और वित्तीय ऑडिट में एआई की बढ़ती भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से टैक्स और जीएसटी से संबंधित प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बन सकती हैं। इससे करदाताओं, व्यवसायों और पेशेवरों को भी कई स्तरों पर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
टैक्स और जीएसटी में एआई की भूमिका
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि एआई आधारित प्रणालियां बड़ी मात्रा में वित्तीय डेटा का तेजी से विश्लेषण कर सकती हैं। इससे, कर रिटर्न की जांच अधिक सटीक हो सकती है। जीएसटी अनुपालन में त्रुटियां कम की जा सकती हैं। संदिग्ध लेन-देन और टैक्स चोरी की पहचान आसान हो सकती है। ऑडिट प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके साथ ही वित्तीय रिपोर्टिंग और अनुपालन में मानवीय त्रुटियों को कम किया जा सकता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए नए अवसर
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई केवल पारंपरिक कार्यों को स्वचालित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका को भी नए स्वरूप में बदल सकता है। भविष्य में डेटा विश्लेषण, जोखिम प्रबंधन, वित्तीय परामर्श और रणनीतिक सलाह जैसे क्षेत्रों में पेशेवरों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
टैक्स चोरी पर लग सकती है रोक
एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली कर विभागों को असामान्य लेन-देन, फर्जी बिलिंग और कर चोरी के मामलों की पहचान करने में मदद कर सकती है। इससे कर प्रशासन अधिक प्रभावी बनने और राजस्व संग्रह में सुधार की संभावना जताई जा रही है।
