*प्रज्ञा प्रवाह पॉलिटेक्निक महाविद्यालय अध्यन केंद्र की मासिक बैठक मे “ संत शिरोमणि श्री रविदास जी के जीवन दर्शन “ पर हुई विचार संगोष्ठी*
*उज्जैन* पॉलीटेक्निक महाविद्यालय मे मालवा प्रान्त प्रज्ञा प्रवाह के अंतर्गत उज्जैन पोलेटेक्निक अध्यन केंद्र मे “संत रवि दास जी के जीवन दर्शन” विषय पर विचार एवं चर्चा संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
आयोजन की अध्यक्षता कर रहे मालवा प्रान्त प्रज्ञा प्रवाह प्रमुख डॉक्टर डी. डी. वेदिया जी ने कहा की संत शिरोमणि श्री रविदास जी महाराज न केवल एक संत, और मानवता के पुजारी थे, अपितु एक युग दृष्टा भी थे, आज हम जिस आधुनिक समरसता पूर्ण एवं खुशहाल समाज की परिकल्पना और जरूरत महसूस कर रहे है। उसकी परिकल्पना तो श्री रवि दास जी ने लगभग 650 वर्ष पहले ही कर ली थी।
उक्त अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह के उज्जैन पोलेटेक्निक महाविद्यालय अध्यन केंद्र के प्रमुख श्री विष्णु नारायण सक्सेना जी ने कहा की संत शिरोमणी श्री रवि दास जी का जीवन भगवान् श्री कृष्ण द्वारा श्री मद् भागवत गीता मे बताये गए ज्ञान योग, कर्म योग और भक्ति योग का पावन संगम है। संत रवि दास जी ने हमेशा ही अपने कर्म को सम्मान दिया तथा कभी किसी भी काम को छोटा बड़ा न मानते हुए एक सच्चे कर्मयोगी की भाती जीवन को व्यतीत करते हुए कर्म योग की शिक्षा दी। उन्होंने एक सच्चे ज्ञान योगी की भाती उद्घोषणा की “ मन चंगा तो कटोथी मे गंगा “ यानी की अगर आपका मन पवित्र और सच्चा है तो आपको बिना किसी कर्मकांड ही सहज रूप से ही ईश्वर की प्राप्ति हो जायेगी।
श्री सक्सेना ने कहा की संत श्री रविदास जी ने निस्वार्थ भाव से सारी उम्र मानवता की सेवा करते हुए भक्ति योग का संदेश दिया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए महर्षि पारणी विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद सदस्य श्री गौरव धाकड़ जी ने कहा की संत शिरोमणि श्री रविदास जी मानवता के सच्चे पुजारी थे एवं उनका उपदेश हर युग मे प्रासंगिक रहेगा।
विचार संगोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए श्री मोकम् सिंह पटेल जी ने कहा की आज सामूची मानवता को संत शिरोमणि श्री रवि दास जी महाराज के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
विचार संगोष्ठी को डॉक्टर आर. के. हरदहा, डॉक्टर दीपेश सोनार, श्री जगन्नाथ बागड़ी,श्री कमलेश मीणा,श्री सौरभ श्रीवास्तव,श्री अजय शर्मा इत्यादि द्वारा संबोधित किया गया। कार्यक्रम मे बड़ी संख्या मे प्रध्यापक गण एवं छात्र उपस्थित थे।