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इंदौर/ सेलम 02 जून, 2026। सेलम, तमिलनाडु के किसान और मिलर समुदाय इस वर्ष साबूदाना/टैपिओका की आवक में उल्लेखनीय कमी का सामना कर सकते हैं। अनुमान है कि आगामी मौसम में वर्षा भी सामान्य से कम रहेगी, जिसके चलते अगले दो से तीन वर्षों तक उत्पादन और आपूर्ति में कमी देखने को मिलेगी। यह परिस्थिति उत्पादकों के लिए अपनी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त करने का एक दुर्लभ अवसर लेकर आई है। इस पृष्ठभूमि में उत्पादकों और मिलर्स से अपील की जा रही है कि वे जल्दबाजी में अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को कम कीमत पर बेचकर नुकसान न उठाएँ।
जहाँ एक सोच यह है कि एकजुट रहकर ही किसान और मिलर समुदाय अपनी मेहनत का सही मुनाफा सुनिश्चित कर सकता है, वहीं दूसरी ओर छोटे और मझले मिलर्स/व्यापारियों के लिए कठिन समय भी है, क्योंकि उनके पास माल रोककर मुनाफे में बेचने की स्थिति हमेशा नहीं होती। मिलर्स के एक समूह का मानना है कि आने वाले वर्षों में उत्पादन की कमी और बाजार की मजबूती को ध्यान में रखते हुए यह समय सभी के लिए अपनी फसल और उत्पाद का वास्तविक मूल्य प्राप्त करने का अवसर है।
श्री गोपाल साबु, चेयरमैन, साबु ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, सेलम के अनुसार “पिछले चार दशकों से हमने बाजार के उतार-चढ़ाव को करीब से देखा है। वर्तमान परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन यह उत्पादकों और व्यापारियों के लिए अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त करने का अवसर भी है। उम्मीद है कि किसान और मिलर समुदाय जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेंगे, साथ ही धैर्यपूर्वक और सोच-समझकर कदम उठायेंगे। आने वाले वर्षों में उत्पादन की कमी और मांग की मजबूती से बाजार में स्थिरता और बेहतर मूल्य की संभावना बनी रहेगी।”
श्री साबु ने आगे बताया कि मिलेट्स (मोटे अनाज) बाजार में हाल के दिनों में मिले-जुले रुझान देखने को मिले हैं। लिटिल मिलेट (मोरधन/बारीक भगर) का सीजन समाप्त होने से इसकी आवक बंद हो चुकी है और नया माल सितंबर से ही उपलब्ध होगा। तैयार माल की मांग मजबूत बनी हुई है, जिसके चलते इसके भावों में लगभग ₹10 प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। कोदो मिलेट (कोदरा/मोटा भगर) में पर्याप्त उपलब्धता के कारण केवल ₹2 प्रति किलो की मामूली बढ़त देखी गई है। बार्नयार्ड मिलेट (झंगोरा) में स्टॉक की भारी कमी से दामों में लगभग ₹20 प्रति किलो की तेज़ी आई है। फिंगर मिलेट (रागी) में हल्की मजबूती रही और इसके भाव ₹1 से ₹2 प्रति किलो बढ़े हैं। वहीं फॉक्सटेल मिलेट (कंगनी) का बाजार स्थिर बना हुआ है और इसका व्यापार पूर्ववत भावों पर ही चल रहा है।
नारियल बूरा (डेसीकेटेड कोकोनट) के बाजार में भारी मंदी का रुख देखने को मिला है। पिछले एक महीने में इसके दाम लगभग ₹50 प्रति किलो तक टूट चुके हैं। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण तमिलनाडु और कर्नाटक में बंपर पैदावार, खाड़ी देशों में युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते निर्यात का ठप्प होना और घरेलू स्तर पर एलपीजी गैस की कमी के कारण मांग में भारी गिरावट है।
साबूदाना (Sago) और स्टार्च बाजार का विश्लेषण दर्शाता है कि घरेलू स्तर पर साबूदाने की खपत सामान्य बनी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें तेजी की संभावना है। टैपिओका कंद का सीजन समाप्त हो चुका है और नई फसल की आवक सितंबर-अक्टूबर के बाद ही शुरू होगी। साथ ही, ‘अधिक मास’ और उसके बाद ‘श्रावण मास’ के दौरान फलाहारी वस्तुओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिसके चलते उत्पादक पहले से ही भाव बढ़ाकर माल बेच रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में भावों में गिरावट की संभावना नहीं दिख रही है।
श्री साबु के अनुसार सेलम के बाजार में तैयार माल और प्रोसेसिंग स्टॉक को मिलाकर अनुमानित आंकड़े बताते हैं कि साबूदाना का स्टॉक लगभग 79,000 टन और स्टार्च का स्टॉक करीब 20,000 टन है। हालांकि इस कुल स्टॉक में उच्च गुणवत्ता वाले माल का प्रतिशत काफी कम है, क्योंकि सीजन के अच्छे माल की आवक लगातार घटती जा रही है।
बाहरी मंडियों के व्यापारियों को फिलहाल बहुत सावधानी से काम करने की जरूरत है। बाजार में अपनी तात्कालिक मांग को देखते हुए ही हर भाव में माल लेते रहें और अपने हाथ में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखें। अगस्त महीने में एक बार फिर बाजार की सही और वास्तविक स्थिति को समझकर ही आगे की बड़ी खरीदारी का निर्णय लेना उचित होगा।
