निप्र,जावरा मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की पिपलौदा तहसील अंतर्गत ग्राम दूधाखेड़ी में आयोजित श्री शिव महापुराण का पंचम दिवस संपन्न हुआ। कथा वाचक मीरापीठाधीश्वर साध्वी अपर्णा जी मेनारिया, मीरापीठ गंधेर प्रतापगढ़ राजस्थान द्वारा साध्वी अपर्णा जी ने शिव महापुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग पूजन का महात्म्य बताया। कथा से पूर्व सैकड़ों महिलाओं और श्रद्धालुओं ने वैदिक विधि से मिट्टी के पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। साध्वी अपर्णा जी ने कहा: शिव महापुराण में लिखा है कि कलियुग में पार्थिव पूजन से बढ़कर कोई पूजन नहीं। मिट्टी से बना एक शिवलिंग भी यदि श्रद्धा से पूज लिया जाए तो करोड़ों यज्ञों का फल मिलता है। पार्थिव शिवलिंग हमें यह सिखाता है कि हम मिट्टी से बने हैं और मिट्टी में मिल जाएंगे। इसलिए अहंकार त्यागकर शिव भक्ति करें। जो नारी पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन करती है, उसे अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। रावण ने भी पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव को प्रसन्न किया था। यह पूजन दरिद्रता, रोग और शत्रु बाधा को नष्ट करता है।
पांडाल में विशेष व्यवस्था कर मिट्टी, गंगाजल, बेलपत्र रखे गए महिलाओं ने एक साथ “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए अपने हाथों से शिवलिंग बनाए। दृश्य अत्यंत भावपूर्ण था। माताओं ने अपनी बेटियों को भी शिवलिंग बनाना सिखाया। साध्वी अपर्णा जी मेनारिया ने स्वयं पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और महिलाओं को विधि बताई। उन्होंने कहा “शिवलिंग बनाते समय मन में कोई भी बुरा विचार न लाएं, केवल भोलेनाथ का स्मरण करें।”सभी निर्मित पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक रुद्राभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, भांग अर्पित की गई। पूरा प्रांगण “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा। कथा के बाद विधि-विधान से सभी शिवलिंग का स्थानीय सरोवर में विसर्जन किया गया।
