इंदौर। ओरिएंटल विश्वविद्यालय, इंदौर के आईपीआर (बौद्धिक संपदा अधिकार) सेल द्वारा डीबीटी-सीटीईपी कार्यक्रम के अंतर्गत 30 मई 2026 को प्रातः 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक “जैव प्रौद्योगिकी एवं बौद्धिक संपदा के नए आयाम : प्रयोगशाला अनुसंधान से बाजार तक नवाचार की यात्रा” विषय पर एक दिवसीय विशेषज्ञ व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों को जैव प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व से अवगत कराना था, ताकि प्रयोगशाला में विकसित शोध को व्यावसायिक उत्पादों एवं तकनीकों के रूप में विकसित किया जा सके।
कार्यक्रम में डॉ. अंजना जाजू, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर ने “जैव उर्वरक : मिट्टी का संवर्धन और स्वास्थ्य का संरक्षण” विषय पर व्याख्यान देते हुए सतत कृषि में जैव उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
वहीं डॉ. नीलेश मालवीय, प्रोफेसर एवं प्राचार्य, स्मृति कॉलेज ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन, इंदौर ने “बौद्धिक संपदा अधिकार : आधुनिक युग में नवाचार का संरक्षण” विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए पेटेंट, कॉपीराइट और अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की उपयोगिता समझाई।
डॉ. धीरज निम, प्रोफेसर एवं एसोसिएट डीन (रिसर्च), ओरिएंटल विश्वविद्यालय, इंदौर ने “शोध से राजस्व तक : बौद्धिक संपदा, कॉपीराइट और ज्ञान आधारित तकनीकी हस्तांतरण” विषय पर शोध के व्यवसायीकरण, तकनीकी हस्तांतरण तथा नवाचार को उद्योगों तक पहुंचाने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने जैव प्रौद्योगिकी नवाचार, पेटेंट प्रक्रिया, बौद्धिक संपदा संरक्षण एवं शोध के व्यवसायीकरण से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो. (डॉ.) क्रतिका डेनियल, संयोजक, आईपीआर सेल एवं प्रोफेसर, फैकल्टी ऑफ फार्मेसी द्वारा किया गया, जबकि समन्वय डॉ. प्रवीण साहू, विभागाध्यक्ष, कृषि संकाय ने किया।
कार्यक्रम की सफलता पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रवीण ठकराल, प्रो-चांसलर प्रो. (डॉ.) ध्रुव घई, मुख्य प्रबंध निदेशक प्रो. (डॉ.) गरिमा घई तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) अमोल गोरे ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी पहल बताया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह विशेषज्ञ व्याख्यान सभी प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं नवाचार को बढ़ावा देने वाला साबित हुआ।
