विश्व अस्थमा दिवस पर केयर सीएचएल अस्पताल की पहल, सांस से जुड़ी समस्याओं पर अहम सलाह
इंदौर, 05 मई 2026। हर साल मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इस बीमारी के सही प्रबंधन के बारे में जानकारी देना है। इस साल वर्ल्ड अस्थमा डे 2026 की थीम “अस्थमा से पीड़ित सभी लोगों के लिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी इनहेलर्स की उपलब्धता अभी भी एक जरूरी आवश्यकता” है। इस दिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को श्वसन संबंधी बीमारियों से बचाव और समय पर उपचार के लिए प्रेरित करते हैं।
इसी कड़ी में केयर सीएचएल अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. निखिलेश पसारी ने लोगों को अस्थमा के प्रति जागरूक रहने और समय पर उपचार लेने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि अस्थमा एक क्रॉनिक श्वसन रोग है, जो सही देखभाल और नियमित इलाज से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. पसारी ने कहा कि अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, बार-बार खांसी और घरघराहट जैसी समस्याएं होती हैं। मौसम में बदलाव, धूल, प्रदूषण, धुआं, परागकण और संक्रमण इसके प्रमुख ट्रिगर हैं। यदि इन संकेतों को समय रहते नजरअंदाज किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
उन्होंने बताया कि आज के समय में प्रदूषण और खराब लाइफस्टाइल के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपने आसपास के वातावरण को साफ रखें और धूल व धुएं से बचाव करें।
डॉ. निखिलेश पसारी ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्थमा का इलाज संभव है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। सही दवाओं, इनहेलर के नियमित उपयोग और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि इनहेलर का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी होता है, इसे लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांति नहीं रखनी चाहिए।
विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी को सांस से जुड़ी समस्या हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। नियमित जांच और समय पर इलाज से अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन को स्वस्थ बनाया जा सकता है।
केयर सीएचएल अस्पताल में आधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की टीम के माध्यम से श्वसन रोगों का सटीक और प्रभावी उपचार किया जा रहा है। अस्पताल द्वारा समय-समय पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है।
