फिल्म समीक्षक: डॉक्टर महेन्द्र यादव

90 के दशक में गूंजा चर्चित संवाद “नायक नहीं, खलनायक हूं मैं” एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटने की तैयारी में है। वर्ष 1993 में प्रदर्शित खलनायक के सीक्वल ‘खलनायक रिटर्न्स’ की घोषणा ने फिल्म उद्योग और दर्शकों के बीच नई उत्सुकता पैदा कर दी है।
तीन दशक पहले आई इस फिल्म ने अपने कथानक, संगीत और प्रभावशाली अभिनय के बल पर खास पहचान बनाई थी। संजय दत्त, माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ की तिकड़ी ने दर्शकों को लंबे समय तक प्रभावित किया। अब 33 वर्षों के बाद इसके अगले भाग की घोषणा को एक बड़े सिनेमाई घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
इस प्रस्तावित फिल्म की विशेषता इसकी कहानी की उत्पत्ति मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, संजय दत्त ने अपने कारावास के दौरान साथी कैदियों के बीच ‘खलनायक’ की कहानी सुनाई थी। इसी दौरान उन्होंने संभावित सीक्वल को लेकर उनकी राय जानी, जिस पर बड़ी संख्या में कैदियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। बताया जाता है कि हजारों कैदियों ने अपनी-अपनी कल्पनाओं को लिखित रूप दिया, जिनसे इस नई कहानी की आधारशिला तैयार हुई।
फिल्म के निर्माण में एक बार फिर सुभाष घई की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है, जिन्होंने मूल फिल्म का निर्देशन किया था। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इस परियोजना में रुचि दिखाई है और इसे मूल फिल्म से अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
घोषणा के बाद से ही दर्शकों में पुरानी यादें ताजा हो उठी हैं और फिल्म को लेकर अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, फिल्म की अंतिम कलाकार सूची और रिलीज तिथि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे इसके प्रति जिज्ञासा और भी बढ़ गई है।
मेरा मानना है कि ‘खलनायक रिटर्न्स’ केवल एक सीक्वल नहीं, बल्कि 90 के दशक की लोकप्रियता को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। यदि यह फिल्म अपने पूर्ववर्ती के प्रभाव को दोहरा पाती है, तो यह दर्शकों के लिए एक महत्वपूर्ण सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है।
