ब्रेकिंग : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या, इतने नए जजों की नियुक्ति को मिली मंजूरी…
Spread the loveरायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की...
Spread the loveरायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की...
Spread the loveरायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व...
Spread the love उड़ते कबूतर और फीनिक्स प्राइड...

रायपुर, 17 अप्रैल 2026

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में टिकाऊ और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि विभाग द्वारा जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में इस वर्ष 600 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद का प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों से अपील की गई है कि वे कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर हरी खाद तकनीक अपनाएं, जिससे मिट्टी की सेहत में सुधार के साथ दीर्घकालीन उत्पादकता सुनिश्चित हो सके।
हरी खाद के अंतर्गत ढेंचा, सनई, मूंग, उड़द और बरसीम जैसी फसलों को खेत में उगाकर 40 से 50 दिन बाद जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इसके पश्चात 2 से 3 सप्ताह बाद मुख्य फसल की बुवाई की जाती है। यह प्रक्रिया मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्वों की पूर्ति करती है।
हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटाश एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, साथ ही जैविक पदार्थों में वृद्धि होती है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बेहतर होती है और भूमि भुरभुरी एवं अधिक उपजाऊ बनती है। हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, की आवश्यकता में कमी आती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का उपयोग कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उपाय है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है। राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
