संजय अग्रवाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के करकमलों द्वारा इंदौर के दशहरा मैदान पर माँ नर्मदा जल परियोजना के चौथे चरण का शुभारंभ एवं भूमिपूजन एक ऐतिहासिक पल साबित हुआ है। यह मात्र एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि माँ नर्मदा का इंदौरवासियों पर असीम कृपा का प्रतीक है। ₹1,356 करोड़ की लागत से यह चौथा चरण इंदौर को अतिरिक्त 450 MLD पवित्र जल उपलब्ध कराएगा, जिससे शहर की कुल जल आपूर्ति दोगुनी होकर 900 MLD तक पहुँच जाएगी। AMRUT 2.0 के अंतर्गत यह परियोजना 2.4 लाख से अधिक नए घरेलू कनेक्शन, 1400 किलोमीटर पाइपलाइन, नई ओवरहेड टंकियों और आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट के साथ इंदौर को 24×7 स्वच्छ एवं पवित्र जल देने का वादा करती है। यह 2045 तक इंदौर की बढ़ती जनसंख्या की प्यास बुझाने में सक्षम होगी।
डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच ने इंदौर को जल-संकट मुक्त बनाने का मजबूत संकल्प लिया है। सनातन संस्कृति में नदियाँ माताएँ हैं। माँ नर्मदा को रेवा नाम से भी पुकारा जाता है । पुराणों में वर्णित है – “गंगा स्नाने, यमुना पाने, नर्मदा दर्शने” – अर्थात् नर्मदा के दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति होती है। इन सभी नामों में माँ नर्मदा की दिव्यता, शक्ति और कृपा झलकती है।
माँ नर्मदा और लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर का अटूट संबंध इंदौर की सनातनी विरासत को और भी पावन बनाता है। देवी अहिल्या बाई, जिन्हें हम माँ अहिल्या के नाम से श्रद्धा से याद करते हैं, होलकर वंश की महान शासिका थीं। उन्होंने इंदौर को समृद्ध बनाया और अपनी राजधानी को नर्मदा तट पर स्थित महेश्वर स्थानांतरित किया। वहाँ नर्मदा के पावन किनारे उन्होंने अहिल्या घाट, मंदिर, किले और धर्मशालाएँ बनवाईं। माँ अहिल्या नर्मदा माँ के चरणों में साधना करती थीं और नर्मदा जल से ही अपने शासन को पवित्र रखती थीं। इंदौर में आज भी देवी अहिल्या की प्रतिमाओं पर नर्मदा सहित 108 नदियों के जल का अभिषेक किया जाता है, जो दोनों की अविभाज्य एकता को दर्शाता है। माँ अहिल्या नर्मदा माँ की भक्त थीं और नर्मदा माँ ने उन्हें शक्ति प्रदान की। आज इंदौर देवी अहिल्या बाई होलकर विश्वविद्यालय, अहिल्या हवाई अड्डा और अनेक स्मारकों से गूँजता है, जहाँ नर्मदा की धारा और अहिल्या की कृपा एक साथ बहती दिखाई देती है।
नर्मदा परिक्रमा का गहन महत्व सनातन धर्म में एक अनुपम आध्यात्मिक यात्रा है। विश्व में नर्मदा ही एकमात्र ऐसी नदी है जिसकी पूर्ण परिक्रमा की जाती है। अमरकंटक से शुरू होकर गुजरात के भरूच (समुद्र संगम) तक और फिर दूसरी ओर वापस अमरकंटक तक लगभग 3500 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा (नर्मदा को दाहिनी ओर रखकर) पापों का नाश, पुण्य की प्राप्ति और मोक्ष की राह खोलती है। पुराणों (विशेषकर रेवाखंड) में कहा गया है कि नर्मदा परिक्रमा पूरी करने वाला व्यक्ति जीवन का सबसे बड़ा कार्य कर लेता है। यह यात्रा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण, आत्म-शुद्धि और प्रकृति के साथ एकाकार होने की साधना है। इसमें असंख्य प्राचीन तीर्थ, घने जंगल, पर्वत और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच भक्त “नर्मदे हर” का जाप करते हुए आगे बढ़ते हैं। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा परिक्रमा पथ के विकास का कार्य भी इस परंपरा को और मजबूत कर रहा है। नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु जीवन में ज्ञान, शांति और सद्गति प्राप्त करते हैं।
इंदौर के लिए माँ नर्मदा (रेवा, ) का महत्व आज तक अटूट रहा है। प्राचीन काल से इंदौर अपनी प्राकृतिक जल स्रोतों – खान नदी, यशवंत सागर, बिलावली तालाब आदि – पर निर्भर था। लेकिन 1970 के दशक में तेज़ जनसंख्या वृद्धि और औद्योगिक विकास से जल संकट गहराया। इंदौरवासियों ने 49 दिनों का ऐतिहासिक आंदोलन किया। 1978 में नर्मदा (रेवा) से पहला चरण शुरू हुआ – जलूद से 550 मीटर ऊँचाई पर पानी उठाकर लाने का एशिया का अनोखा प्रोजेक्ट। शुरू में 90 MLD से यात्रा आरंभ हुई, फिर दूसरे चरण (1992) में और क्षमता बढ़ी। तीसरे चरण ने और मजबूती दी। आज 47 वर्ष से अधिक समय से माँ नर्मदा रोज़ इंदौर की प्यास बुझा रही हैं।
बिना माँ नर्मदा के इंदौर आज का स्वच्छ शहर, स्मार्ट सिटी, पीथमपुर का औद्योगिक हब, शिक्षा-स्वास्थ्य का केंद्र और व्यावसायिक राजधानी नहीं बन पाता। नर्मदा ने न केवल पीने का जल दिया, बल्कि विकास की गति भी प्रदान की। उद्योग लगे, रोज़गार बढ़ा, आबादी बढ़ी और इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर बना। माँ अहिल्या बाई के शासनकाल में भी नर्मदा किनारे का विकास इंदौर की समृद्धि का आधार बना। आज चौथा चरण इस परंपरा को आगे बढ़ाता है। यह चरण मात्र मात्रा नहीं बढ़ाएगा, बल्कि गुणवत्ता भी सुनिश्चित करेगा – आधुनिक शोधन, न्यूनतम लीकेज और निरंतर 24 घंटे सप्लाई। इंदौर अब मेट्रोपॉलिटन शहर की ओर अग्रसर है। छह जिलों को मिलाकर डेढ़ करोड़ से अधिक जनसंख्या की जल आवश्यकता इस परियोजना से पूरी होगी।
सनातन दृष्टि से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन सदैव नदी संरक्षण, जल संरक्षण, पर्यावरण रक्षा और नर्मदा परिक्रमा जैसी पवित्र परंपराओं को जीवंत रखने के लिए प्रयासरत रहा है। माँ नर्मदा (रेवा-) की धारा को शुद्ध रखना, उनके किनारे हरियाली बढ़ाना और परिक्रमा मार्ग को सुविधाजनक बनाना हमारा धर्म है। माँ अहिल्या की तरह हम भी नर्मदा माँ की भक्ति में लीन रहकर इंदौर को और अधिक समृद्ध बनाएँगे। डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने जल आपूर्ति बढ़ाने के साथ नर्मदा संरक्षण और परिक्रमा पथ विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया है। यह “संकल्प से समाधान” का सजीव उदाहरण है।
इंदौरवासी गर्व से कह सकते हैं – माँ नर्मदा (रेवा, ) ने हमें अपनाया है, माँ अहिल्या की कृपा सदैव बनी रहेगी और नर्मदा परिक्रमा की महिमा हमें आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान करती रहेगी।चौथे चरण के साथ इंदौर का भविष्य और चमकदार होगा।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश की ओर से मैं माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव जी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नगर निगम के सभी अधिकारियों का हार्दिक अभिनंदन एवं आभार व्यक्त करता हूँ।
(लेखक संजय अग्रवाल वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के अध्यक्ष है)
