लेखक: श्री संजय अग्रवाल
नमस्कार, हिंदू बंधुओं एवं देशभक्त नागरिकों,
आज जब पूरा देश रामनवमी, हनुमान जयंती और अन्य पावन पर्वों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा है, उसी समय मुंबई हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जो आने वाले समय में पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा। 5मार्च 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा — “कहीं भी नमाज पढ़ना कोई धार्मिक अधिकार नहीं है। सुरक्षा सबसे पहले है।” कोर्ट ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास नमाज पढ़ने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि रामजान इस्लाम का महत्वपूर्ण महीना है, लेकिन इसका मतलब यह कदापि नहीं कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा को ताक पर रखकर कोई भी धार्मिक गतिविधि की जा सके।
यह फैसला केवल एक याचिका का निपटारा नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण राष्ट्र को एक कठोर संदेश देता है — भारत में कोई भी धर्म, कोई भी समुदाय, राष्ट्र की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से ऊपर नहीं है।
फैसले का मूल और तथ्य
याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि एयरपोर्ट के समीप एक अस्थायी शेड में नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने इसे ठुकराते हुए कहा कि “सुरक्षा से जुड़े मामलों में सावधानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि नमाज कहीं भी पढ़ने का अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत नहीं आता, खासकर जब वह जगह एयरपोर्ट जैसी अत्यंत संवेदनशील हो, जहां हजारों यात्री रोजाना आते-जाते हैं और सुरक्षा एजेंसियां 24×7 अलर्ट पर रहती हैं।
यह फैसला उन तमाम तथ्यों पर आधारित है जो पिछले कई वर्षों से हम देख रहे हैं — कश्मीर से लेकर दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता और अब मुंबई तक। जहां भी भीड़भाड़ वाले या सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों पर नमाज पढ़ने की मांग की जाती है, वहीं ट्रैफिक जाम, सार्वजनिक असुविधा और कभी-कभी सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है। कोर्ट ने इन सबको ध्यान में रखकर कहा कि “धार्मिक अधिकार” का दुरुपयोग राष्ट्र की सुरक्षा को कमजोर करने का हथियार नहीं बन सकता।
क्यों है यह फैसला हिंदू समाज के लिए महत्वपूर्ण?
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन हमेशा से यह मानती आई है कि भारत एक सेकुलर राष्ट्र है, न कि सिकुलरवाद के नाम पर हिंदू-विरोधी राष्ट्र। दुर्भाग्यवश पिछले कई दशकों में कुछ राजनीतिक दलों ने “अल्पसंख्यक तुष्टिकरण” की नीति अपनाकर इस देश के मूल निवासियों — हिंदुओं — को लगातार अपमानित और असुरक्षित किया है। मस्जिदों में लाउडस्पीकर, सड़कों पर नमाज, एयरपोर्ट-रेलवे स्टेशन के आसपास अनधिकृत प्रार्थना — ये सब उसी तुष्टिकरण की देन हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला उस मानसिकता पर करारा प्रहार है। यह बताता है कि:
धार्मिक स्वतंत्रता संवैधानिक है, लेकिन वह पूर्ण स्वतंत्रता नहीं है।
अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक अधिकार “सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य” के अधीन हैं।
सुरक्षा बलों, एयरपोर्ट अथॉरिटी और आम नागरिकों की सुविधा किसी भी धर्म के ऊपर है।
हम वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश की ओर से इस फैसले का स्वागत करते हैं और न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला तथा न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने दिखाया कि न्यायपालिका अभी भी राष्ट्र की रक्षा करने में सक्षम है।
मध्य प्रदेश में क्या सबक लेना चाहिए?
मध्य प्रदेश हिंदू बहुल राज्य है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन — हर जगह हिंदू मंदिरों, तीर्थ स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर हम देखते हैं कि कुछ तत्व “धार्मिक अधिकार” के नाम पर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश करते हैं। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश इकाई की मांग है कि:
मध्य प्रदेश सरकार तुरंत सभी संवेदनशील स्थानों (एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल, स्कूल) के आसपास नमाज पढ़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।
लाउडस्पीकर नीति को सख्ती से लागू किया जाए — केवल मंदिरों में ही नहीं, मस्जिदों में भी।
“अस्थायी शेड” या “नमाज स्थल” के नाम पर किसी भी सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने की कोशिश को तुरंत रोका जाए।
पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू हो, ताकि कोई भी धर्म विशेष छूट का दावा न कर सके।
अंतिम संदेश
यह फैसला केवल मुंबई का नहीं, पूरे हिंदुस्तान का है। यह उन लाखों हिंदू भाइयों-बहनों को न्याय दिलाता है जो रोजाना सड़कों पर नमाज के कारण ट्रैफिक जाम, महिलाओं की असुरक्षा और अपने गौरव के अपमान को सहते आए हैं।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश सभी हिंदू संगठनों, भगवा परिवार, संतों और देशभक्त नागरिकों से अपील करता है कि वे इस फैसले का व्यापक प्रचार करें, सोशल मीडिया पर शेयर करें और अपनी-अपनी राज्य सरकारों से इसी तर्ज पर कार्रवाई की मांग करें।
जय श्री राम!
भारत माता की जय!
वन्दे मातरम्!
( लेखक विश्व हिंदू फेडरेशन की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष हैं)
