उज्जैन । जिले में गेहूं सहित अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने बताया कि कलेक्टर द्वारा जनहित में यह आदेश जारी किया गया है, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। जानकारी के अनुसार वर्तमान में अधिकांश गेहूं की फसल कटाई कम्बाइन हार्वेस्टर से की जाती है। कटाई के बाद खेतों में बचे डंठलों (नरवाई) को कई किसान जला देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है तथा पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। इससे खेत की मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं और उत्पादन भी प्रभावित होता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल अवशेष प्रबंधन के लिए स्ट्रॉ रीपर से भूसा बनाएं, शेष डंठलों को रोटावेटर, मल्चर, कल्टीवेटर या देशी पाटा से मिट्टी में मिला दें या पूसा डिकंपोजर तथा यूरिया के छिड़काव से उसे खाद में परिवर्तित करें। भूसे का उपयोग पशु आहार एवं अन्य उद्योगों में भी किया जा सकता है। आदेश के अनुसार फसलों की कटाई में उपयोग होने वाले प्रत्येक कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ भूसा तैयार करने के लिए भूसा मशीन का उपयोग अनिवार्य रहेगा। बिना स्ट्रॉ रीपर या स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के कम्बाइन हार्वेस्टर चलाने पर मशीन संचालक पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड या हार्वेस्टर जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिले में तथा अन्य राज्यों से आने वाले हार्वेस्टर संचालकों को अपनी मशीन और कार्यक्षेत्र की जानकारी संबंधित थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा। पर्यावरण विभाग एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार फसल अवशेष जलाना प्रतिबंधित है। आदेश का उल्लंघन करने पर पर्यावरण क्षति पूर्ति अर्थदंड लगाया जाएगा। 2 एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों पर 2,500 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक भूमि वाले कृषकों पर 5,000 रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले कृषकों पर 15,000 रुपये प्रति घटना अर्थदंड देय होगा।