संजय अग्रवाल
प्रिय सनातन धर्म के सच्चे सैनिकों, भक्तों और भारत माता के प्रेमियों,
जय श्री राम! जय भक्त प्रह्लाद! जय नरसिंह भगवान! जय श्री कृष्ण! राधे-राधे!!
मध्य प्रदेश के इंदौर से निकलकर मैंने हाल ही में ब्रजभूमि की 7दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा की—और यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार बन गई। हर कदम पर कृष्ण की लीला, राधा का प्रेम और सनातन की जीवंत शक्ति महसूस हुई।
1. बरसाना की लठमार होली – राधा रानी की शक्ति और प्रेम का खेल (25 फरवरी 2026, बुधवार)
यात्रा की शुरुआत बरसाना से हुई—राधा रानी की नगरी। लठमार होली देखकर लगा जैसे समय रुक गया हो। महिलाएँ (गोपियाँ) लाठियाँ लेकर पुरुषों (ग्वालों, जो कृष्ण के साथी का प्रतिनिधित्व करते हैं) पर प्रहार करतीं, लेकिन यह प्रहार प्रेम का, छेड़छाड़ का और लीला का था। पुरुष ढाल बनाकर बचते, रंग-गुलाल उड़ता, हँसी-ठिठोली गूंजती। हजारों भक्त इकट्ठे थे—महिलाएँ इतनी जोशीली कि लगा राधा रानी स्वयं उतर आई हों! यह परंपरा बताती है कि प्रेम में कोई हार-जीत नहीं, सिर्फ मिलन की मधुरता है। स्त्री शक्ति की यह जीवंत अभिव्यक्ति देखकर गर्व हुआ—हमारी संस्कृति में देवी को कितना सम्मान है! बरसाना ने मुझे सिखाया: प्रेम की लाठी से बड़ा कोई हथियार नहीं।
2. ग्यारस (रंगभरी एकादशी) की होली – बांके बिहारी जी की फूलों वाली दिव्य लीला (27 फरवरी 2026, शुक्रवार)
फिर पहुंचे वृंदावन में बांके बिहारी जी के दरबार। रंगभरी एकादशी (ग्यारस) पर होली का आगाज हुआ—यह फूलों की होली है, रंगों से नहीं, बल्कि गुलाल, फूलों की पंखुड़ियों और प्रेम से। मंदिर में ठाकुर जी को फूलों की वर्षा हुई, भक्तों पर पंखुड़ियाँ बरसाई गईं। “राधे राधे” के स्वर, भजन, आरती—पूरी वातावरण में प्रेम की सुगंध। यह दिन होली की शुरुआत का प्रतीक है, जहाँ कृष्ण को गुलाल चढ़ाया जाता है। खड़े होकर लगा कि बांके बिहारी जी की मुस्कान कह रही हो—”भक्ति से सब रंगीन हो जाता है।” यह होली ने मुझे याद दिलाया: सच्चा रंग प्रेम का होता है, जो कभी फीका नहीं पड़ता।
3. गिरिराज जी की पैदल परिक्रमा और जतिपुरा में दर्शन – गोवर्धन की कृपा और शक्ति
अगला पड़ाव गिरिराज गोवर्धन। पैदल परिक्रमा (21 किमी) की—जतिपुरा से शुरूआत की, जहाँ मुखारविंद (गिरिराज जी का मुख) के दर्शन किए। छप्पन भोग चढ़ाया, दूध की धारा बहाई, प्रार्थना की। जतिपुरा वह पवित्र स्थल है जहाँ गोवर्धन जी का मुख प्रकट हुआ—भक्तों की भीड़ में खड़े होकर लगा जैसे गिरिराज स्वयं बोल रहे हों: “मैं तुम्हारा बोझ उठाता हूँ, तुम बस भरोसा रखो।” परिक्रमा के दौरान राधा कुंड, श्याम कुंड, दानघाटी, मानसी गंगा—हर जगह कृष्ण की बाल-लीला जीवंत थी। पैरों में छाले आए, लेकिन मन में अमृत था। यह परिक्रमा सिर्फ चलना नहीं—पापों का नाश, आत्म-शुद्धि है। गिरिराज जी ने सिखाया: सच्ची भक्ति में थकान नहीं, सिर्फ आनंद और विश्वास है।
4. आज फालैन गांव में संजू पंडा द्वारा अग्नि पार करना – प्रह्लाद की अमर लीला का साक्षी (3 मार्च 2026, मंगलवार तड़के)
और आज—3 मार्च 2026 की तड़के करीब 4 बजे—मथुरा के फालैन (फलेन) गांव में वह चमत्कार देखा जो शब्दों में बयाँ नहीं होता। होलिका दहन के बाद 20-25 फीट ऊँची धधकती लपटें, जलते अंगारों का समुद्र। संजू पंडा (पंडा परिवार के युवा पुजारी) ने 45 दिनों की कठोर साधना के बाद—फल-दूध पर जीवन, ब्रह्मचर्य, प्रह्लाद मंदिर में तप—नंगे पैर उस भीषण अग्नि में प्रवेश किया। बीच में रुककर अग्नि देवता को प्रणाम किया, और कुछ सेकंड में सुरक्षित बाहर! शरीर पर एक चिंगारी भी नहीं लगी। उनकी बहन ने कलश से अर्घ्य दिया, हजारों भक्त “भक्त प्रह्लाद की जय!” चिल्ला रहे थे। विदेशी पर्यटक भी स्तब्ध थे। मैंने खुद आँखों से देखा—यह कोई जादू नहीं, भक्ति की शक्ति थी! 5200 वर्ष पुरानी परंपरा—प्रह्लाद की अग्नि-परीक्षा का जीवंत रूप। संजू जी के पिता सुशील पंडा 8 बार, भाई मोनू कई बार कर चुके हैं। फालैन बताता है: अच्छाई की बुराई पर जीत निश्चित है, और भक्ति से अग्नि भी शीतल हो जाती है!
ये चार अनुभव—बरसाना की लठमार, बांके बिहारी की ग्यारस होली, गिरिराज की परिक्रमा, और फालैन की अग्नि—एक ही संदेश देते हैं: सनातन धर्म जीवित है, शाश्वत है, अजेय है! लाठी प्रेम बन जाती है, फूल रंग बन जाते हैं, पहाड़ बोझ उठाते हैं, और अग्नि शीतल हो जाती है।
मध्य प्रदेश से ब्रज तक, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के कार्यकर्ता सदा तैयार हैं—भोजशाला, काशी, मथुरा जन्मभूमि—हम सनातन की रक्षा के लिए एक कदम आगे बढ़ेंगे। यह यात्रा ने सिखाया: हम हार नहीं सकते, क्योंकि हमारे साथ राम, कृष्ण, प्रह्लाद, नरसिंह और गिरिराज हैं!
आइए संकल्प लें—प्रह्लाद जैसी निष्ठा, राधा जैसा प्रेम, संजू पंडा जैसी निर्भीकता अपनाएँ। अपनी संतानों को बताएँ: हमारा धर्म चमत्कार नहीं—सत्य, भक्ति और त्याग की अनंत शक्ति है!
सभी दिव्य स्थलों और संजू पंडा जी को कोटि-कोटि प्रणाम!
जय भक्त प्रह्लाद! जय श्री कृष्ण! जय सनातन धर्म! भारत माता की जय! जय श्री राम!
सादर एवं अगाध भक्ति से,
( लेखक वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन की मध्यप्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष है )
