नई दिल्ली ।ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हालिया सैन्य हमलों के बाद मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में उपजे तनाव ने वैश्विक हवाई यातायात की कमर तोड़ दी है। युद्ध की विभीषण स्थिति को देखते हुए कई देशों द्वारा अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) बंद किए जाने के कारण भारत सहित पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों पर गहरा असर पड़ा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, ईरान और आसपास के क्षेत्रों में लगे हवाई प्रतिबंधों के चलते शनिवार को भारतीय एयरलाइंस की लगभग 410 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। संकट की गंभीरता को देखते हुए रविवार 1 मार्च को भी 444 अन्य उड़ानों के रद्द होने की आशंका जताई गई है, जिससे कुल प्रभावित उड़ानों का आंकड़ा 850 के पार पहुंचने का अनुमान है। यह वैश्विक विमानन संकट 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइलें दागकर जवाबी कार्रवाई की। सुरक्षा कारणों से ईरान, इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, इजराइल, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे महत्वपूर्ण देशों ने अपने आसमान को विमानों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। फ्लाइट ट्रैकिंग सेवाओं के मुताबिक, इन क्षेत्रों में हवाई यातायात लगभग ठप हो गया है, जिससे दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे दुनिया के सबसे व्यस्त हब एयरपोर्ट्स पर सन्नाटा पसरा है। लाखों यात्री दुनिया भर के हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं और अपनी मंजिलों तक पहुंचने के लिए अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। भारत में विमानन नियामक संस्था डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविगेशन (डीजीसीए) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक्शन लिया है। डीजीसीए ने भारतीय एयरलाइंस को सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए 2 मार्च तक प्रभावित 11 देशों के हवाई क्षेत्र का उपयोग न करने की सलाह दी है। इस निर्देश के बाद इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख कंपनियों ने खाड़ी देशों के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है, क्योंकि सामान्य रूट बंद होने के कारण विमानों को लंबे और वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़ रहा है। इससे न केवल उड़ान का समय बढ़ गया है, बल्कि ईंधन की खपत और परिचालन लागत में भी भारी इजाफा हुआ है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय का पैसेंजर असिस्टेंस कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय है। हवाई अड्डों पर उमड़ रही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है और एयरसेवा पोर्टल के माध्यम से यात्रियों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। 28 फरवरी को दर्ज हुईं 216 शिकायतों में से लगभग आधी का तत्काल समाधान कर यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की गई। एयरलाइंस ने प्रभावित यात्रियों को टिकट रीशेड्यूलिंग और रिफंड के विकल्प दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में यह तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत से खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों के बीच हवाई यात्रा न केवल महंगी होगी, बल्कि आने वाले दिनों में उड़ानों का संकट और गहरा सकता है।
