देवास : मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हो गया। हादसे में धीरज, सनी और सुमित नामक तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। घायलों में 13 की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया है। इनमें से नौ घायलों को इंदौर के एक अस्पताल भेजा गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका इतना जोरदार था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद फैक्ट्री से ऊंची लपटें और धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया। फैक्ट्री की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। घटना के बाद पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।
बारूद तैयार करते समय हुआ विस्फोट
स्थानीय लोगों ने बताया कि फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान केमिकल का अनुपात बिगड़ने से अचानक तेज धमाका हो गया। जिस स्थान पर विस्फोट हुआ, वहां उस समय 25 से 30 मजदूर काम कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि हादसा लंच ब्रेक से करीब 15-20 मिनट पहले हुआ। मजदूरों के लिए खाना भी पहुंच चुका था, लेकिन धमाके के बाद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
कलेक्टर ने कहा- जांच जारी
कलेक्टर ऋतुराज ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और फिलहाल स्थिति पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि विस्फोट के समय फैक्ट्री में कई मजदूर काम कर रहे थे। अचानक आग कैसे लगी, इसकी भी जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा समेत वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और हादसे की जांच के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने तथा घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।
ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही का आरोप
हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन और अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित फैक्ट्री के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार फैक्ट्री में करीब 400 से 500 मजदूर काम करते थे। पुरुष मजदूरों को प्रतिदिन 400 रुपये और महिला मजदूरों को करीब 250 रुपये मजदूरी दी जाती थी। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाता था।