कुछ ही कलाकार होते हैं जो डायलॉग्स को यादगार बना देते हैं, और रणवीर सिंह उन्हीं में से एक हैं। उन्हें अपनी पीढ़ी का बेहतरीन अभिनेता माना जाता है। उनकी फिल्में सिर्फ हिट फिल्मों की लिस्ट नहीं हैं, बल्कि ऐसे किरदारों की कहानी हैं जो फिल्म खत्म होने के बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा रहते हैं। उनकी खासियत है ताकत और भावनाओं के बीच संतुलन बनाना। जब यही संतुलन उनके डायलॉग बोलने के अंदाज से मिलता है, तो शब्द सिर्फ डायलॉग नहीं रहते, याद बन जाते हैं।
चाहे मसाला फिल्में हों या गहरी कहानी वाली फिल्में, रणवीर ने बार-बार साबित किया है कि एक मजबूत डायलॉग पूरे दौर को परिभाषित कर सकता है। धुरंधर 2 को लेकर उत्साह बढ़ रहा है, ऐसे में उनके सबसे यादगार डायलॉग्स को दोबारा देखना सही समय है, क्योंकि ये डायलॉग्स एक ऐसे अभिनेता की यात्रा दिखाते हैं जो सिनेमा के इतिहास में एक अहम मुकाम पर खड़ा है।
धुरंधर
हम्ज़ा सिर्फ एक किरदार नहीं था, बल्कि एक ताकत था। घायल, गुस्से से भरा और खतरनाक। रणवीर ने इस रोल में दर्द को ताकत और खामोशी को डर में बदल दिया।
“घायल हूं इसलिए घातक हूं।”
इस एक लाइन ने हम्ज़ा की खतरनाक सोच को पूरी तरह दिखा दिया और “हम्ज़ा फीवर” शुरू हो गया। पार्ट 2 में कहानी और भी आगे बढ़ने वाली है, जिसका अंदाज़ा इस डायलॉग से मिलता है:
“अगर तुम लोगों के पटाखे खत्म हो गए हो, तो मैं धमाका शुरू करूं।”
रॉकी और रानी की प्रेम कहानी
रॉकी रंधावा के किरदार में रणवीर ने मर्दानगी की परिभाषा ही बदल दी—तेज, भावुक, रंगीन और फिर भी दिल से सच्चा। दिखावे के पीछे संवेदनशीलता और मज़ाक के पीछे दिल था।
“ताड़ लो जितना ताड़ना है… ऑल नैचुरल, नो स्टेरॉयड्स।”
मस्ती भरा डायलॉग, जो रॉकी के आत्मविश्वास और चार्म को दिखाता है।
सिंबा
सिंबा वर्दी में स्टाइल था। पहले भ्रष्ट, लापरवाह और घमंडी, फिर एक ऐसे इंसान में बदलता है जो सही और गलत का फर्क समझता है।
“जो देतो त्रास, त्यांचा मी घेतो क्लास।”
यह डायलॉग सिंबा के अंदाज, मज़ाक और उसके न्याय के तरीके को दिखाता है।
पद्मावत
अलाउद्दीन खिलजी के रूप में रणवीर ने हिंदी सिनेमा के सबसे डरावने विलेन में से एक को जन्म दिया। सत्ता की भूख और जुनून से भरा किरदार।
“खिलजियों ने आज तक कभी हार कबूल नहीं की…”
ठंडे और डरावने अंदाज़ में बोला गया यह डायलॉग उसकी निर्दय सोच को दिखाता है।
बाजीराव मस्तानी
रणवीर का बाजीराव आग की तरह था—निडर, समर्पित और अडिग। एक ऐसा योद्धा जिसकी पहचान उसकी रफ्तार और हिम्मत थी।
“बाजीराव की रफ्तार ही बाजीराव की पहचान है।”
यह लाइन सिर्फ बाजीराव को नहीं बताती, वही बन जाती है।
गोलियों की रासलीला राम-लीला
राम जुनून का दूसरा नाम था—लापरवाह लेकिन प्यार करने वाला, बहादुर और बेखौफ।
“हीरो बनने के लिए जिगर चाहिए… और जब जिगर हो तो भरी बंदूक का क्या काम?”
प्यार और हिम्मत का ऐलान, पूरी ताकत के साथ।
दिल धड़कने दो
कबीर मेहरा के किरदार में रणवीर ने शांत लेकिन गहरी घुटन को दिखाया। यह किरदार हर उस इंसान से जुड़ा जिसने अपने ही परिवार में खुद को अनसुना महसूस किया हो।
“फैमिली में सब ऊपर-ऊपर से बात करते हैं, असली बात कोई नहीं करता।”
“दिल से फैसला करो कि तुम्हें क्या करना है, दिमाग रास्ता निकाल लेगा।”
सरल डायलॉग्स, लेकिन गहरी सच्चाई के साथ।
अगर रणवीर सिंह पहले ही एक ही भाषा (हिंदी) में ₹850 करोड़ से ज्यादा कमाने वाले अकेले अभिनेता बन चुके हैं और कई रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं, तो सवाल साफ है—अगर धुरंधर 2 भी वही रफ्तार पकड़ ले तो क्या होगा?
जवाब भी साफ है। तब रणवीर एक ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएंगे जहां तुलना या मुकाबले की बात ही नहीं रहेगी। चर्चा इस पर होगी कि क्या कोई उनके स्तर तक पहुंच भी सकता है। दमदार किरदार, यादगार डायलॉग्स और रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों के साथ, रणवीर सिंह सिर्फ सफलता नहीं बना रहे—वह अपनी विरासत (लीगेसी) बना रहे हैं।
