संसाधनों की कमी अब पढ़ाई में बाधा न बने, इसी सोच के साथ शुरू हुई ‘संभव’ पहल
Spread the love‘संभव’ पहल के माध्यम से बोर्ड...
Spread the love‘संभव’ पहल के माध्यम से बोर्ड...
Spread the love*मुंबई*कोमल नाहटा अब ज़ी स्टूडियोज़ के...
Spread the loveमुंबई, हिंदी सिनेमा हाल के समय...
रायपुर, 22 नवम्बर 2025

कला और संस्कृति की प्रतिष्ठित धरती खैरागढ़ शुक्रवार की रात को रंग–रस–संगीत की रंगीन छटा से निखर उठी। बहुप्रतीक्षित खैरागढ़ महोत्सव के समापन समारोह में राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि खैरागढ़ की सांस्कृतिक धरोहर न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान है, बल्कि यह भारत की विविध कला-पद्धतियों का जीवंत केंद्र भी है। उन्होंने बताया कि यहां की संस्कृति रामायण काल से भी प्राचीन है। उन्होंने कहा कि संस्कृति के संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में कला के प्रति प्रेम और संरक्षण की प्रेरणा जगाते हैं तथा कलाकारों को अपने हुनर के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।
समारोह में विशिष्ट अतिथि रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि खैरागढ़ भारत की कला-राजधानी के रूप में उभर रहा है और यह महोत्सव आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त करेगा।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि खैरागढ़ महोत्सव विद्यार्थियों की साधना, सृजनशीलता और कला-अनुसंधान का सशक्त मंच है तथा विश्वविद्यालय भविष्य में राष्ट्रीय कला केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
समारोह में नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने कथक, भरतनाट्यम व ओडिसी नृत्य की सधी हुई प्रस्तुतिया दी। कोलकाता से आए मशहूर सरोदवादक उस्ताद सिराज अली खान और लंदन के तबला वादक पंडित संजू सहाय की जुगलबंदी ने संगीतमय वातावरण रचा। पंडित संजू सहाय के द्वारा तबला वादन की प्रस्तुति दी गई। पुणे की प्रख्यात कथक नृत्यांगना विदुषी शमा भाटे एवं उनके समूह ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर कथक नृत्य की प्रस्तुतियां दी ।
राजनांदगांव की लोकगायिका श्रीमती कविता वासनिक एवं उनके दल ने लोकसंगीत अनुराग धारा की प्रस्तुति दी।
