जगदलपुर, 9 सितंबर । छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक भर्ती घोटाले और नियुक्तियों में हुए भ्रष्टाचार के मामले को भाजपा के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया था। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने शासन द्वारा जांच समिति गठन कर प्रकरण की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी।
इस मामले काे लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि विभिन्न अखबारों में छपी खबरों के अनुसार शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में प्राध्यापक भर्ती में हुई गड़बड़ी के सबूत जांच दल को मिले हैं। उन्हाेंने कहा कि अत्यंत विश्वसनीय सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर में शिक्षकों की भर्ती में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दी है। खास बात यह है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही चयनित शिक्षकों ने ज्वाइनिंग दे दी है।
रिपोर्ट के आधार पर जिन शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी पाई गई है, उन्हें हटाने की अनुशंसा की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक विश्वविद्यालय का नहीं बल्कि यह मामला इस जैसे सभी शिक्षण संस्थान को डुबाने की घटिया रणनीति का हिस्सा है। बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज श्रीवास्तव को पूरे मामले में दोषी पाया गया है। जब जांच में अनियमितता की पुष्टि हो गई है, तो आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले कुलपति मनोज श्रीवास्तव को तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय में भर्ती संबंधित सभी दस्तावेजों को सील करना चाहिए। ताकि आरोपित किसी भी प्रकार से बच ना सके।
विश्वविद्यालय में 59 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ था, आरोप लगे कि भर्ती प्रक्रिया में यूजीसी-2018 के नियमों की अनदेखी की गई। आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं हुआ, आयु सीमा के संबंध में संशोधित विज्ञापन जारी नहीं हुआ। रूरल टेक्नोलॉजी विषय में रूरल टेक्नोलॉजी विषय के विशेषज्ञ बुलाए बिना मेरिट सूची जारी दुर्गेश डिकसेना की अवैधानिक नियुक्ति, सैकड़ो आवेदकों को साक्षात्कार में बुलाकर नाट फाउंड सुटेबल करने, यहां तक कि 50 साल से अधिक उम्र के उम्मीदवारों को भी नियुक्त कर दिया जाना। कई चयनित अभ्यर्थी प्रदेश से बाहर के बताए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के फॉरेस्ट्री विभाग में कार्यरत एक ऐसोसिएट प्रोफेसर पर पैसो के लेनदेन के लिए काल करने समेत अनेको आरो
प लगे थे।
