नई दिल्ली (उषा माहना/ माधव एक्सप्रेस) दुनिया आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ राष्ट्र अपनी सुरक्षा के लिए हथियारों, मिसाइलों और टैंकों पर खरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं। लेकिन यह सवाल लगातार गहराता जा रहा है कि क्या यह खर्च वास्तव में मानवता को सुरक्षित बना रहा है? असली सुरक्षा तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आपसी विश्वास से ही संभव है। यही सोच लेकर ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कॉन्फ़्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल जैन ने एक गहन विचार मंथन प्रस्तुत किया है।
अतुल जैन का कहना है कि आज के दौर में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संगठन अपनी भूमिका निभाने में विफल साबित हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र बड़ी शक्तियों का केंद्र बन गया है, जहाँ वीटो पावर ने समानता और न्याय की भावना को कमजोर कर दिया है। NATO जैसे संगठन केवल कुछ देशों के सैन्य गठबंधन तक सीमित हैं, जो पूरी मानवता का प्रतिनिधित्व नहीं करते। वहीं OIC, BRICS और अन्य संगठन धार्मिक, आर्थिक या क्षेत्रीय हितों तक ही बँधे हैं, जिससे असमानता और विभाजन और गहरा होता है।
उनके अनुसार, अब समय है एक नई वैश्विक व्यवस्था की। ऐसी व्यवस्था जिसमें हर देश की भागीदारी उसकी जनसंख्या, संसाधनों और योगदान के आधार पर तय हो। जहाँ स्थायी वीटो जैसी असमानताओं का स्थान न हो और जिम्मेदारियाँ समानुपात में बाँटी जाएँ। यह नया ढाँचा पारदर्शी और न्यायपूर्ण होना चाहिए, ताकि किसी भी शक्ति का वर्चस्व न रह सके।
भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए अतुल जैन ने कहा कि भारत ने हमेशा शांति और सहयोग का मार्ग दिखाया है। आज दुनिया भारत के डिजिटल मॉडल—UPI, Aadhaar और ONDC—की सराहना कर रही है, जो खुलेपन और निष्पक्षता का प्रतीक है। भारत का दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम्” केवल एक आदर्श वाक्य नहीं बल्कि जीवन की वास्तविक दृष्टि है, जो पूरी दुनिया को जोड़ सकती है।
इसी भावना के आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया है कि वे इस नई वैश्विक संस्था के सूत्रधार बनें। भारत की संस्कृति, विचार और नेतृत्व क्षमता पूरी दुनिया को एक मंच पर लाने में सक्षम है।
अतुल जैन का मानना है कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या मानवता हथियारों पर आधारित सुरक्षा पर ही भरोसा करती रहेगी, या फिर विश्वास और न्याय पर आधारित एक नए वैश्विक संतुलन की ओर कदम बढ़ाएगी। उनका विश्वास है कि भारत इस नए युग का नेतृत्व कर सकता है और जिस दिन दुनिया की लगभग 40% आबादी और संसाधन इस नए मंच से जुड़ेंगे, मौजूदा शक्तियाँ स्वतः अप्रासंगिक हो जाएँगी।
उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के भविष्य को दिशा देने का है। अब समय है कि भारत और प्रधानमंत्री मोदी जी एक नई विश्वयात्रा की शुरुआत करें।
अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी नई व्यवस्था बने, उसमें पारदर्शिता, जिम्मेदारी और सबकी सुनिश्चित सहभागिता होनी चाहिए। तभी यह ढाँचा स्थायी और विश्वसनीय साबित होगा तथा वास्तव में मानवता के लिए सुरक्षा और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा।
