एसईपीसी लिमिटेड के एमडी ने बर्नपुर में सेल-आईआईएससीओ स्टील प्लांट के साथ ₹८५४.५७ करोड़ के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर; कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹१०,००० करोड़ के पार
Spread the loveचेन्नई, 11 अक्टूबर २०२६: औद्योगिक अवसंरचना,...
Spread the loveचेन्नई, 11 अक्टूबर २०२६: औद्योगिक अवसंरचना,...
Spread the love जाने-माने दूरसंचार सेवा प्रदाता वी...
Spread the loveनई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026: सोनी...
श्रीनगर,आतंकवाद पीडि़तों को संस्थागत सहायता प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पीडि़त परिवारों के लिए एक समर्पित पोर्टल लॉन्च किया। उपराज्यपाल ने कहा कि यह पहल केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद से पीडि़त लोगों को राहत, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य प्रकार की सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और त्वरित करेगी।
गृह विभाग द्वारा एनआईसी के सहयोग से विकसित यह वेब पोर्टल, आतंकवाद प्रभावित परिवारों का व्यापक जिलावार डेटा एकत्र करने और बनाए रखने के लिए केंद्रीकृत मंच के रूप में कार्य करेगा। पीडि़तों या उनके रिश्तेदारों की संपत्ति पर किसी भी अतिक्रमण का विवरण भी एकत्र किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी वैध मामला अनसुलझा न रहे और पात्र परिवारों को वित्तीय राहत, अनुग्रह राशि और अनुकंपा रोजगार के रूप में समय पर सहायता प्रदान की जाए, साथ ही किसी भी फर्जी या एकाधिक दावों को समाप्त करना सुनिश्चित किया जाए।
उपराज्यपाल व्यक्तिगत रूप से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सभी मामलों के निवारण की निगरानी और देखरेख कर रहे हैं। जम्मू (0191-2478995) और कश्मीर (0194-2487777) दोनों संभागों के संभागीय आयुक्तों के कार्यालयों में टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी स्थापित किए गए हैं ताकि किसी भी उपेक्षित या लंबित दावों के पंजीकरण में सुविधा हो।
आतंकवाद प्रभावित परिवारों को लंबित सरकारी सहायता जैसे मुआवज़ा, अनुग्रह राशि और अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित शिकायतों या प्रश्नों को प्राप्त करने के लिए इन हेल्पलाइनों पर नागरिक इंटरफेस के रूप में समर्पित नियंत्रण कक्षों के माध्यम से ध्यान दिया जा रहा है। इन हेल्पलाइनों में प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात किए गए हैं और इन्हें केंद्रीकृत एप्लिकेशन के साथ एकीकृत किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक दावे का औपचारिक रूप से पंजीकरण हो और उस पर कार्रवाई की जाए। शिकायतों और लंबित दावों पर नियमित निगरानी, समन्वय और अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के कार्यालयों में विशेष निगरानी प्रकोष्ठों का गठन किया गया है। ये विशेष प्रकोष्ठ समय-समय पर लंबित और निपटाए गए मामलों की स्थिति की समीक्षा करेंगे प्रसंस्करण में देरी या बाधाओं का विश्लेषण करेंगे और दावों का समय पर और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय करेंगे। इस अवसर पर मुख्य सचिव अटल डुल्लू, डीजीपी नलिन प्रभात, गृह विभाग के प्रधान सचिव चंद्राकर भारती, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मंदीप के. भंडारी, जीएडी के आयुक्त सचिव एम राजू, कश्मीर के संभागीय आयुक्त विजय कुमार बिधूड़ी, जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार, कश्मीर के आईजीपी वीके बिरदी, जम्मू के आईजीपी भीम सेन टूटी और एनआईसी के एसआईओ एस. जसकरण सिंह मोदी व्यक्तिगत रूप से और वर्चुअल माध्यम से उपस्थित थे।
