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– एम्स का दावा जांच में औसतन 25 फीसदी लोग मिले पॉजिटिव भोपाल,मप्र में खौफनाक बीमारी सिकल सेल के खात्मे के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश के राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने इस रोग को खत्म करने के लिए स्क्रीनिंग के बाद जेनेटिक काउंसलिंग पर विशेष ध्यान देने की भी बात कह चुके हैं। इसके एम्स भोपाल द्वारा बैतूल जिले में लगाए गए कैंप में औसतन 25 प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रसित पाए जा रहे हैं। जोकि काफी चिंता का विषय है। दरअसल एम्स द्वारा लगाई गई शिविर में जांच रिपोर्ट आने पर पता चला कि जिन लोगों की जांच की गई उनमें से 24.7 फीसदी लोग पॉजिटिव पाए गए। हालांकि वैतूल कलेक्टर का कहना है कि हमारे पास ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। सिकल सेल एक वंशानुगत रक्त विकार है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी अनजाने में फैलता रहता है। समय पर जांच और जानकारी से इस रोग की रोकथाम संभव है। एम्स ने एक संस्था के साथ लगाया था शिविर एम्स भोपाल और मध्य प्रदेश थैलेसीमिया जन जागरण समिति के संयुक्त तत्वावधान में 28 जून को आमला तहसील के बोदरझी स्थित पैराडाइज स्कूल में एक दिवसीय नि:शुल्क सिकल सेल स्क्रीनिंग एवं जनजागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य गंभीर आनुवंशिक रक्त विकारों जैसे सिकल सेल एनीमिया व बीटा थैलेसीमिया के प्रति जनसामान्य को जागरूक करना और नि:शुल्क परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराना था। शिविर में कुल 169 लोगों की पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्ट के माध्यम से जांच की गई, जिनमें 101 बच्चे, 68 वयस्क शामिल थे। इनमें से 44 लोग (लगभग 24.7 प्रतिशत) प्रारंभिक परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए, जिन्हें एम्स भोपाल के पैथोलॉजी विभाग में एचपीएलसी कन्फर्मेटरी जांच के लिए भेजा गया। जांच में 28 लोग (लगभग 16 प्रतिशत) सिकल सेल ट्रेट से ग्रसित पाए गए, जबकि 14 लोग (लगभग 7.8 प्रतिशत) सिकल सेल डिजीज के रोगी पाए गए। इसके अतिरिक्त, दो लोग बीटा थैलेसीमिया से पीडि़त पाए गए। प्रभावित क्षेत्रों में जांच और इलाज की सुविधा दुर्लभ एम्स के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने कहा कि आज भी सिकल सेल प्रभावित क्षेत्रों में जांच और इलाज की सुविधा दुर्लभ है। ऐसे शिविरों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाई जा सकती है। एम्स भोपाल लगातार इन क्षेत्रों में रोगियों की पहचान, जांच और काउंसलिंग कर रहा है ताकि इस आनुवंशिक रोग की श्रृंखला को समय पर तोड़ा जा सके।
