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बलरामपुर, 5 जुलाई । अबिकापुर से बलरामपुर होते हुए रामानुजगंज तक 145 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग 343 इस समय बेहद बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और उन गड्डों में 8 से 12 इंच तक जमा पानी लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। बारिश के मौसम में यह सड़क किसी छोटे-छोटे तालाब की तरह नजर आ रही है। इस मार्ग पर हर रोज वाहन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
दोपहिया वाहन चालकों से लेकर चार पहिया और भारी वाहनों तक के लिए यह रास्ता जानलेवा साबित हो रहा है। यह सड़क अंबिकापुर से झारखंड के गढ़वा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, लेकिन इसकी हालत जर्जर हो चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि सड़क पर मामूली मरम्मत का काम भी सही तरीके से नहीं हो रहा। सप्ताहभर पहले एनएच विभाग ने बारिश के बीच आनन-फानन में सड़क पर पेचिंग कराई थी, लेकिन वह सप्ताह भर भी नहीं टिक सकी। आज शनिवार तक तक सारी पेचिंग उखड़ गई और सड़क फिर से पुराने हाल में लौट गई। इससे स्थानीय लोगों में सड़क की हालत को देखकर विभाग के प्रति गुस्सा है, क्योंकि इस मार्ग पर आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं।
फिलहाल 351 करोड़ से टू-लेन सड़क बनेगी
एनएच विभाग से मिली जानकारी अनुसार, अंबिकापुर से रामानुजगंज तक फिलहाल टू-लेन सड़क का निर्माण होगा। राजपुरी खुर्द से पस्तापारी तक 49 किमी सड़क 240 करोड़ रुपओ की लागत से बनेगी, जबकि बलरामपुर के बड़की मेहरी से रामानुजगंज तक की सड़क के लिए 111 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वन विभाग को सड़क किनारे के पेड़ों की कटाई के लिए लगभग 44 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। पेड़ों की कटाई का काम तेजी से जारी है और सड़क निर्माण कार्य बारिश के बाद शुरू होने की संभावना है। हालांकि, जब तक नई सड़क का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक लोगों को इस बदहाल सड़क पर ही सफर करना पड़ेगा।
भारी वाहन और निजी गाड़ियां गहरे गड्डों में फंस रहीं
सड़क की अस्थायी मरम्मत के नाम पर बीते दिनों अग्रसेन चौक से बस डिपो तक की सड़क पर बरसते पानी में जल्दबाजी में की गई पेचिंग दो दिन में ही उखड़ गई। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते केवल कागजों पर काम हो रहा है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। राष्ट्रीय राजमार्ग 343 की स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि रामानुजगंज से अंबिकापुर तक की यात्रा एक दुःस्वप्न बन गई है। भारी वाहन, यात्री बसें और निजी गाड़ियां गहरे गड्डों में फंस रही हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग और भी खतरनाक साबित हो रहा है।
