रायपुर, 21 जून । सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज शनिवार को विशेष संक्रिया कमान मुख्यालय, नया रायपुर में बड़े ही उल्लास और अनुशासन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात बल के 1,000 से अधिक कार्मिकों ने एक साथ योगाभ्यास कर यह संदेश दिया कि योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, बल्कि सामूहिक मनोबल और आत्मबल के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम का आयोजन सीमा सुरक्षा बल के उच्च अधिकारियों की देखरेख में प्रातःकालीन समय में किया गया, जिसकी शुरुआत पावन ‘योग मंत्र’ और शांति प्रार्थना के साथ हुई। वातावरण में योग संगीत की मधुर ध्वनि और सूर्य की प्रथम किरणों के साथ जैसे ही योग सत्र आरंभ हुआ, समूचा परिसर एक अनुशासित साधना-स्थली में परिवर्तित हो गया।
योग सत्र के दौरान प्रशिक्षित योग गुरुओं ने जवानों को विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया। इसमें ताड़ासन, वज्रासन, भुजंगासन, त्रिकोणासन, और मकरासन जैसे शारीरिक व्यायामात्मक आसनों के साथ-साथ कपालभाति, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम पर विशेष ध्यान दिया गया। सत्र के अंतिम चरण में ध्यान एवं शांति पाठ का अभ्यास कराया गया, जिससे उपस्थित सभी जवानों को गहन मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा बल के जवानों को यह समझाया गया कि किस प्रकार योग के नियमित अभ्यास से तनावग्रस्त ड्यूटी, विषम परिस्थितियों और मानसिक दबाव के बीच भी एक सुदृढ़ मानसिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है। जवानों को यह भी बताया गया कि योग केवल एक कसरत नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, शांति और सेवा के साथ जीने की पद्धति है।
बीएसएफ जैसे केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए जहां दिन-रात सेवा देना कर्तव्य है, वहीं मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में योग एक अत्यंत प्रभावी साधन के रूप में उभरा है, जो न केवल शरीर को सशक्त बनाता है, बल्कि निर्णय क्षमता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन भी बढ़ाता है।
कार्यक्रम के अंत में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल ने सभी अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि , “आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण परिस्थितियों में योग ही एक ऐसा माध्यम है, जो हमें स्वयं से जोड़ता है। यह हमें मानसिक दृढ़ता, आत्म-नियंत्रण और अनुशासन सिखाता है, जो एक सैनिक के लिए अत्यंत आवश्यक गुण हैं। हर एक जवान को अपने रोज़मर्रा के जीवन में योग को नियमित रूप से अपनाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि योगाभ्यास से जवानों की कार्यक्षमता और ऊर्जा में वृद्धि होती है, जो सीधे तौर पर राष्ट्र की सुरक्षा और सेवा में योगदान करता है।
नया रायपुर में आयोजित इस भव्य योग सत्र ने यह भी दर्शाया कि सुरक्षा बल केवल शस्त्र और रणनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह संस्कृति, संतुलन और स्वस्थ जीवन शैली को भी समान रूप से अपनाते हैं। आयोजन के दौरान जवानों की एकरूपता, अनुशासन और एकाग्रता ने उपस्थित अधिकारियों और आमंत्रित अतिथियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इस आयोजन ने यह सशक्त संदेश दिया कि चाहे सीमाओं की सुरक्षा हो या जीवन में संतुलन बनाए रखने की कला-योग हर मोर्चे पर कारगर है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने खड़े होकर एक स्वर में भारत माता को नमन किया और एक स्वस्थ, समरस और अनुशासित जीवन की ओर बढ़ने का संकल्प लिया।
