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रायपुर, 16 जून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने साेमवार काे बयान जारी कर तेंदूपत्ता संग्राहकों के प्रतिभाशाली बच्चों को शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्ति की शर्तों में किए गए अनुचित बदलाव को आदिवासी विरोधी बताया है। उन्हाेंने कहा कि भाजपा सरकार के इशारे पर राज्य वनोपज सहकारी संघ ने पूर्व निर्धारित योग्यता 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने के स्थान पर संशोधन करते हुए शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से 10 वीं 12 वीं में 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को ही प्रतिभाशाली शिक्षा प्रोत्साहन योजना का लाभ देने का फैसला लिया है, जो पूरी तरह से अनुचित है। इस योजना के तहत 10 वीं के होनहार छात्र छात्राओं को 75 प्रतिशत या अधिक अंक लाने पर 15 हजार और 12 वीं में 25 हजार देने का प्रावधान है। वनोपज सहकारी संघ के इस दुर्भावनापूर्ण फैसले से प्रदेश के 13 लाख 50 हजार वनोपज संग्राहक परिवारो के बच्चों के हितों पर विपरीत असर पड़ेगा।
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि तेंदुपत्ता संग्राहक परिवार ज्यादातर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत हैं, जहां शिक्षा सुविधा बेहद सीमित है। अभाव और सीमित संसाधनों पर निर्भर ग्रामीण और वनांचलों में रहने वाले आदिवासी परिवारों के बच्चों के लिए 10 वीं और 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक हासिल करना बहुत बड़ी उपलब्धि है। राज्य वनोपज सहकारी संघ के मनोनीत संचालक सदस्यों द्वारा 90 प्रतिशत की अंक वृद्धि ने वनोपज संग्राहक परिवारो के बच्चों को छात्रवृत्ति के लाभ से लगभग बाहर कर दिया है। इस दुर्भावना पूर्वक निर्णय के चलते अधिकांश छात्र-छात्राएं इस योजना के लाभ से वंचित हो जाएंगे।
सुरेंद्र ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार लगातार आदिवासियों के हक और अधिकारों को छिनने का काम कर रही है। पहले मोदी सरकार ने 1 अप्रैल 2019 से तेंदूपत्ता संग्राहक बीमा योजना में केन्द्रांश बंद किया, फिर विगत वर्ष साय सरकार ने शहीद महेंद्रकर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक बीमा योजना बंद किया, वनांचल के गोठानों में संचालित वनोपजों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के काम बाधित किए, उनके मार्केटिंग की व्यवस्था को ध्वस्त किया और अब इस तरह से तेंदूपत्ता संग्राहक प्रतिभाशाली शिक्षा प्रोत्साहन योजना में अनुचित संशोधन करके गरीब आदिवासी परिवार के बच्चों को शिक्षा के लाभ से वंचित करना चाहती है।
