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कोरबा, 18 अप्रैल ।एनटीपीसी, कोरबा अस्पताल अब इलाज के मामले में मरीजों के साथ भेदभाव नहीं कर सकेगा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक प्रकरण में सुनवाई करते हुए इस आशय का आदेश पारित किया है। 17 अप्रैल, 2025 को पारित अपने आदेश (प्रकरण क्र. सीसी/24/110) में आयोग ने लिखा है कि, एनटीपीसी अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया जाता है कि वे भविष्य में संविधान में आम नागरिक को अनुच्छेद 14 एवं 21 में प्रदत्त समानता एवं त्वरित उपचार के मौलिक अधिकार के उल्लंघन में कोई कार्य न करें। मरीजों के उपचार के संबंध में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। विरोधी पक्षकार अपने अस्पताल में नीतियों एवं प्रक्रियाओं को स्वास्थ्य सेवा में स्थापित नैतिक एवं कानूनी मानकों के अनुरूप तैयार करें।
आयोग ने अपने आदेश में यह भी लिखा है कि अस्पताल प्रबंधन ने परिवादी के प्रति सेवा में कमी एवं व्यवसायिक कदाचरण का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया जाता है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा किया गया कृत्य असंवैधानिक तथा सेवा में कमी का घोर कदाचरण के श्रेणी का कृत्य है। सुनवाई के दौरान एनटीपीसी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं डा. धमेन्द्र प्रसाद द्वारा आयोग को बताया गया था कि अस्पताल के प्रोटोकॉल के तहत एनटीपीसी कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को इलाज में प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन एनटीपीसी अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रोटोकॉल का कोई लिखित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। परिवादी की ओर से अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने मजबूती के साथ आयोग के समक्ष पैरवी की और प्रकरण को परिणाम तक पहुंचाया। केस में विरोधीपक्षकार यानी एनटीपीसी, कोरबा अस्पताल के सीएमओ डा. विनोद काल्हटकर, शल्य चिकित्सक धमेन्द्र प्रसाद के अधिवक्ता आरएन राठौर ने पैरवी की। प्रकरण में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रंजना दत्ता एवं सदस्य पंकज कुमार देवड़ा की बेंच द्वारा सुनवाई करते हुए अंतिम आदेश पारित किया गया।
यह था पूरा मामला-एनटीपीसी, जमनीपाली निवासी मोहम्मद सादिक शेख द्वारा एनटीपीसी, कोरबा के शल्य चिकित्सक धमेन्द्र प्रसाद एवं सीएमओ डा. विनोद काल्हटकर के विरूद्ध इलाज में भेदभाव करने संबंधी परिवाद अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। इसमें बताया गया था कि 2 अगस्त, 2024 को घर की छत पर कार्य करने के दौर फिसलकर गिर जाने से बायें पसली में चोट आ गई थी। इलाज के लिए संध्या को निर्धारित शुल्क जमा कर एनटीपीसी, कोरबा के विभागीय अस्पताल में शल्य चिकित्सक धर्मेंद्र प्रसाद को दिखाया गया था। डॉक्टर ने एनटीपीसी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के बाद मोहम्मद सादिक शेख को बुलाया तथा दवाइयां लिखते हुए एक्सरे के लिए कहा, लेकिन देर हो जाने के कारण एक्सरे कक्ष बंद हो चुका था। डाक्टर ने दूसरे दिवस आकर एक्सरे कराने कहा। 3 अगस्त, 2024 को मोहम्मद सादिक शेख ने शुल्क जमा कर एक्सरे करवाया तथा इसकी रिपोर्ट दिखाने डा. धर्मेंद्र प्रसाद के पास गए। श्री शेख का दूसरा क्रम था, लेकिन इस बीच एक के बाद एक एनटीपीसी कर्मचारी इलाज के लिए आने लगे और डा. धर्मेंद्र प्रसाद द्वारा उन्हें देखा जाने लगा। इस पर मोहम्मद सादिक शेख द्वारा आपत्ति जताई गई और कहा गया कि उनका दूसरा नम्बर और उनका नम्बर लगाने के बाद चार एनटीपीसी कर्मचारी को देखा गया। इस पर डा. धर्मेंद्र प्रसाद ने कहा कि यह उनका प्रोटोकॉल है कि एनटीपीसी के कर्मचारी और उनके परिवार का इलाज पहले किया जाएगा।मोहम्मद सादिक शेख ने प्रोटोकॉल का लिखित आदेश दिखाने की बात कही तो इस पर डा. धर्मेंद्र प्रसाद भड़क गए और दुर्व्यवहार करते हुए सीएमओ से बात करने कहा गया।
सीएमओ डा. विनोद काल्हटकर ने भी कहा कि अस्पताल का प्रोटोकाल है कि एनटीपीसी कर्मचारी को इलाज में प्राथमिकता दी जाएगी। सीएमओ से भी प्रोटोकॉल का कोई आदेश है तो दिखाने कहा गया तो उन्होंने भी परिवादी के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया तथा इलाज करने से मना कर दिया गया। मोहम्मद सादिक शेख ने मामले की शिकायत पहले दर्री थाने में की। थाने से एक माह बाद लिखित में, प्रकरण हस्तक्षेप योग्य नहीं है, का जवाब दिया गया। इसके बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया गया।
