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जगदलपुर, 21 फ़रवरी । मध्य प्रदेश के बालाघाट मुठभेड़ में दाे दिन पहले मुठभेड़ में मारी गईं चार महिला नक्सलियों की शिनाख्त हाे गई है। यह सभी छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की निवासी हार्डकोर नक्सली थींं और एके-47, इंसास, एसएलआर जैसे राइफल चलाना जानती थीं। इन पर छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र पुलिस ने कुल 62 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
मध्यप्रदेश पुलिस की मानें तो छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों पर दबाव बढ़ रहा है, इसलिए वहां के नक्सली मध्यप्रदेश में डेरा जमाने के लिए अपना नया ठिकाना ढूंढने पहुंच रहे हैं। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. शुक्रवार काे बताया कि मारी गई चाराे महिला नक्सलियाें काे नक्सल संगठन के बड़े कैडर्स कुछ साल पहले यहां से लेकर गए थे। उन्हाेंने बताया कि बस्तर के लोगों को गुमराह कर नक्सली इनका उपयाेग मुठभेड़ में ढाल के रूप में करते हैं और स्वयं बचकर भाग जाते हैं।
बालाघाट के आईजी संजय कुमार के अनुसार मारे गये नक्सली इकाई को ‘केबी’ डिवीजन के नाम से भी जाना जाता था। केबी डिवीजन की कमांडर आशा थी, जो छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की रहने वाली थी। उस पर कुल 20 लाख रुपये का इनाम था। इनमें महाराष्ट्र में 12 लाख, छत्तीसगढ़ में पांच लाख और मध्यप्रदेश में तीन लाख रुपये का इनाम घोषित था। आई संजय कुमार ने बताया कि मारी गईं नक्सली रंजीता, शीला और लक्खे मरावी पर 14-14 लाख रुपये का इनाम था। रंजीता उर्फ रामली आलमी छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले की रहने वाली थी। इन पर महाराष्ट्र में छह लाख रुपये, छत्तीसगढ़ में पांच लाख रुपये और मध्यप्रदेश में तीन लाख रुपये का इनाम घाेषित था। सरिता उर्फ शीला उर्फ पदम मूल रूप से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की रहने वाली थी। उस पर महाराष्ट्र में छह लाख रुपये, छत्तीसगढ़ में पांच लाख रुपये और मध्यप्रदेश में तीन लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा सुकमा की निवासी लक्खे मरावी भी पर महाराष्ट्र में छह लाख रुपये, छत्तीसगढ़ में पांच लाख रुपये और मध्यप्रदेश में तीन लाख रुपये का इनाम था। उन्हाेंने बताया कि इन चाराे नक्सलियों के शव के पास से एक इंसास राइफल, एक एसएलआर राइफल, एक पॉइंट 303 और 315 सिंगल शॉट गन बरामद की गई है।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि बस्तर में नक्सलियों का आधार क्षेत्र खत्म होता जा रहा है। लगातार हो रहे मुठभेड़ में नक्सलियों के कई बड़े कैडर्स मारे गए हैं। इसके साथ ही नक्सलियाें कई काेर इलाकों में सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित हो चुके हैं। उन्हाेंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार डाल दें। हिंसा में कुछ नहीं रखा है, मुख्यधारा में लौट आएं। उन्हाेंने बताया कि इस अपील का असर भी हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
